नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव (Lok Sabha election) से पहले कांग्रेस पार्टी, अतीत में की गई उन सारी भूलों या गलतियों से सबक सीखकर आम चुनाव की तरफ कदम आगे बढ़ाना चाहती है. यही वजह है कि पिछले साल तेलंगाना में हुए विधानसभा चुनाव में तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के साथ गठबंधन को भी पार्टी इन ‘गलतियों’ की श्रेणी में रख रही है. अंग्रेजी वेबसाइट इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक आने वाले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी टीडीपी के साथ गठबंधन नहीं करेगी. यही नहीं, पार्टी ने यह निर्णय भी लिया है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में भी वह टीडीपी के साथ गठबंधन नहीं करेगी. इसके बजाए वह आंध्रप्रदेश में अकेले दम पर चुनाव में उतरने की योजना बना रही है. समाचार एजेंसी भाषा ने भी कांग्रेस पार्टी के आंध्रप्रदेश में आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान सत्तारूढ़ टीडीपी से अलग रहने की पुष्टि की गई है.

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अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने कहा, ‘हम सभी 175 विधानसभा सीटों और 25 लोकसभा सीटों पर अकेले लड़ेंगे. टीडीपी के साथ हमारा गठबंधन केवल राष्ट्रीय स्तर पर है, ऐसे में हम राज्य में गठबंधन (इसके साथ) नहीं करेंगे.’ अमरावती में पीसीसी पदाधिकारियों की एक बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में चांडी ने कहा कि वे चुनाव की तैयारियों के बारे में चर्चा करने के लिए फिर 31 जनवरी को एकत्र होंगे. उन्होंने कहा कि राज्य कांग्रेस ने फरवरी में सभी 13 जिलों में एक बस यात्रा निकालने का निर्णय किया है. चांडी ने प्रियंका गांधी वाड्रा को कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश -पश्चिम की प्रभारी नियुक्त किए जाने का स्वागत किया.

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पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘प्रियंका जैसी बुद्धिमान और साहसी नेता की राष्ट्रीय राजनीति में जरूरत है. देश भी चाहता है कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनें.’’ एपीसीसी अध्यक्ष एन रघुवीर रेड्डी ने कहा कि वे चुनावी गठबंधन का निर्णय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर छोड़ते हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस आंध्रप्रदेश में अपने दम पर चुनाव लड़ेगी. आंध्रप्रदेश में कांग्रेस पार्टी के अकेले चुनाव लड़ने को सियासी जानकार, आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विपक्षी दलों के प्रस्तावित महागठबंधन के ‘आकार’ न लेने से जोड़कर भी देख रहे हैं. दरअसल, कांग्रेस और भाजपा के अलावा विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय पार्टियां भी लोकसभा चुनाव को देखते हुए गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ने के पक्ष में एकजुट होती दिख रही हैं. इसके अलावा सियासी जानकारों का कहना है कि तेलंगाना में जिस तरह गठबंधन में रहते हुए भी कांग्रेस को विधानसभा चुनावों में नुकसान उठाना पड़ा, पार्टी इसके बाद टीडीपी के साथ रहकर लोकसभा चुनाव लड़ने का जोखिम नहीं उठा सकती है.

(इनपुट – एजेंसी)