नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को पूर्व सैनिकों के एक समूह से कहा कि कांग्रेस नीत सरकार ‘एक रैंक, एक पेंशन’ (ओआरओपी) को लेकर पार्टी द्वारा किए गए सभी वादे पूरी करेगी. गांधी ने यह बात यहां कांग्रेस मुख्यालय में सेवानिवृत्त रक्षा कर्मियों के साथ आधे घंटे चली एक बैठक के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत में कही. बैठक के दौरान राफेल सौदा और कश्मीर स्थिति का मुद्दा भी उठा.

गांधी ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के बाद पूर्व सैनिकों से कहा कि यदि उनकी पार्टी 2019 के लोकसभा चुनाव में सत्ता में आई तो वह सभी वादे पूरे करेगी जो कांग्रेस ने ओआरओपी मुद्दे पर किए थे. उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों ने मुझे बताया कि ओआरओपी लागू नहीं किया गया है और उन्होंने अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की.

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बैठक में पूर्व सैन्यकर्मियों ने जम्मू कश्मीर को लेकर सरकार के गलत एवं असामरिक रुख का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि राफेल मुद्दा भी उठा. गांधी ने कहा, ”ये मुद्दे जुड़े हुए हैं. उनके (सरकार) पास अनिल अंबानी को देने के लिए 30 हजार करोड़ रुपए हैं, लेकिन हमारे सैनिकों को ओआरओपी नहीं दिया जा सकता. यह संबंध है.” उन्होंने कहा कि ओआरओपी मुद्दा 30,000 करोड़ रुपए की राशि से आराम से सुलझाया जा सकता था.
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने फ्रांसीसी लड़ाकू विमान सौदे में आफसेट सौदे पर अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी का पक्ष लिया. निजी कंपनी ने हालांकि आरोपों को खारिज किया है.

गांधी ने बाद में ट्वीट किया, ”अनिल के लिए राफेल से 30 हजार करोड़ रुपए + सभी प्रक्रियाओं की अनदेखी+ सीबीआई निदेशक को आधी रात में बर्खास्त करना. सुरक्षा बलों के लिए कोई ओआरपी नही + युद्ध पदक प्राप्त पूर्व सैन्यकर्मियों के साथ धक्का मुक्की + झूठ एवं टूटे हुए वादे.”

बैठक में पूर्व रक्षा मंत्री ए के एंटनी, कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत, कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला और रक्षा बलों के कई सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.

ओआरओपी लागू करने को लेकर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) सतबीर सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने गांधी से अपील की है कि वे मुद्दों को सरकार के समक्ष उठायें क्योंकि कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी है.

सिंह ने कहा, हम सैनिक हैं और सड़कों पर हैं. हम अपमानित महसूस कर रहे हैं. हम मांग करते हैं कि सेना की गरिमा उसी तरह बहाल की जाए जैसी 15 अगस्त 1947 में थी.

गांधी ने कहा कि जिस प्रकार पूर्व सैन्यकर्मी हताश और अपमानित महसूस कर रहे हैं, उसे देख कर उन्हें पीड़ा हो रही है. ”वे इस बात को खुले आम नहीं कहेंगे किन्तु बैठक में यह बात सामने आयी.”

गहलोत ने बैठक के बारे में ट्वीट किया और बैठक में शामिल कुछ सदस्यों द्वारा व्यक्त किये गए विचार साझा किये. उन्होंने बैठक की कुछ तस्वीरें भी साझा की. उन्होंने ट्वीट किया, ” राजग द्वारा राफेल सौदा रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीपीपी) पैरा 28, 80, 104-105 का पूर्ण उल्लंघन है :

भारतीय सेना के भूतपूर्व सैनिक.” इससे पहले बैठक में सतबीर सिंह ने कहा कि भूतपूर्व सैनिक ” ओआरओपी मुद्दे पर बहुत चिंतित और दुखी हैं.” उन्होंने बैठक में आरोप लगाते हुए कहा, ”दुर्भाग्य से 1231 दिन का संघर्ष हो चुका है और हमें प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्रों की एक अभिस्वीकृति नहीं मिली है, आखिरी पत्र पांच दिन पहले भेजा गया था. उन्होंने कहा कि भूतपूर्व सैनिकों को एक रैंक एक पेंशन लागू करने का वादा किया गया था, लेकिन यह लागू होने के कहीं भी नजदीक नहीं है.

सिंह ने कहा, ” मुख्य विपक्षी दल का अध्यक्ष होने के नाते हम आपसे अनुरोध करते हैं कि इन मुद्दों को सभी के साथ उठायें जिसमें अन्य दल भी शामिल हैं.” उन्होंने अन्य मुद्दों के साथ ही भूतपूर्व सैनिकों के लिए एक आयोग के गठन का प्रस्ताव किया जिसका नेतृत्व एक भूतपूर्व सैनिक द्वारा किया जाए.