नई दिल्ली: मध्य प्रदेश कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय से आग्रह किया कि राज्य विधान सभा में रिक्त हुये
स्थानों के लिए उपचुनाव होने तक सरकार के विश्वास मत प्राप्त करने की प्रक्रिया स्थगित की जाए. कांग्रेस ने यह भी दलील
दी कि अगर उस समय तक कमलनाथ सरकार सत्ता में रहती है तो आसमान नहीं टूटने वाला है. वहीं, बीजेपी नेताओं की
ओर से कहा, Also Read - VIDEO: Coronavirus Lockdown के बीच DIG रात में साइकिल पर निकले

जस्टिस धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ मध्य प्रदेश में कांग्रेस के 22 बागी विधायकों के इस्तीफे
से उत्पन्न राजनीतिक संकट को लेकर भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर
रही है. Also Read - MP में कोरोना संक्रमित पाए गए दो IPS अधिकारी, दोनों को भेजा गया Isolation Center

कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने कहा, ”यदि उपचुनाव होने तक कांग्रेस सरकार को सत्ता में बने रहने दिया
जाता है तो इससे आसमान नहीं गिरने वाला है और शिवराज सिंह चौहान की सरकार को जनता पर थोपा नहीं जाना चाहिए.” Also Read - मध्य प्रदेश में 'टोटल लॉकडाउन' के बाद लागू हुआ 'एस्मा', शिवराज सिंह चौहान ने दी जानकारी

कांग्रेस के वकील दवे ने कहा, उन्हें दुबारा चुनाव का सामना करने दीजिये और फिर विश्वास मत कराया जाये. आपने (भाजपा)
यह सब किया है. मेरी याचिका में सीधा हमला किया गया है कि आपने ही साजिश रची है.

शिवराज सिंह चौहान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने इस तर्क का जबर्दस्त प्रतिवाद किया और आरोप लगाया
कि 1975 में आपात काल लगाकर लोकतंत्र की हत्या करने वाली पार्टी अब डॉ बी आर आम्बेडकर के उच्च सिद्धांतों की दुहाई
दे रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफे, जिनमे से छह इस्तीफे स्वीकार किये जा चुके हैं, के बाद राज्य
सरकार को एक दिन भी सत्ता में बने रहने नहीं देना चाहिए.

रोहतगी ने कहा, ” यह सत्ता का लाभ है, जिसकी वजह से यह उच्च सिद्धांतों की दलीलें दी जा रही हैं. यह कभी नहीं सुना कि बहुमत खो देने वाला व्यक्ति कह रहा है कि उसे छह महीने सत्ता में बने रहने दिया जाये और विश्वास मत से पहले दुबारा चुनाव होने चाहिए.” उन्होने दावा किया कि राज्य में कमल नाथ सरकार किसी न किसी तरह सत्ता में बने रहना चाहती है.

इससे पहले दिन में, मध्य प्रदेश कांग्रेस पार्टी ने पीठ से कहा कि राज्य विधानसभा अध्यक्ष को भाजपा नेताओं द्वारा उसके
बागी विधायकों के इस्तीफों के मामले की जांच कराने की आवश्यकता है. दवे ने कहा कि राज्यपाल को सदन में शक्ति
परीक्षण कराने के लिये रात में मुख्यमंत्री या अध्यक्ष को संदेश देने का कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने ने कहा, अध्यक्ष सर्वेसर्वा
है और मध्य प्रदेश के राज्यपाल उन्हें दरकिनार कर रहे हैं.

कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया कि उसके बागी विधायकों से बलपूर्वक और धमका कर ये इस्तीफे लिए गए हैं. कांग्रेस ने दावा
किया कि उसके विधायकों ने अपनी मर्जी से इस्तीफे नहीं दिए हैं. कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने कहा कि उसके बागी विधायकों को चार्टर्ड उड़ान से ले जाया गया है और इस समय वे भाजपा द्वारा की गयी व्यवस्था के तहत एक रिजार्ट में हैं और उनसे संपर्क नहीं हो सकता है.

कांग्रेस के बागी विधायकों के इस्तीफों के मामले में भाजपा की भूमिका की ओर पीठ का ध्यान आकर्षित करते हुये दवे ने कहा
कि होली के दिन भाजपा नेता विधानसभा अध्यक्ष के आवास पर पहुंचे और उन्हें 19 विधायकों के पत्र सौंपे.

मप्र कांग्रेस विधायक दल ने मंगलवार को शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर अनुरोध किया था कि उसके बागी विधायकों से
संपर्क स्थापित कराने का केन्द्र और कर्नाटक की भाजपा सरकार को निर्देश दिया जाये. कांग्रेस का कहना है कि उसके
विधायकों को बेंगलुरू की एक रिजार्ट में रखा गया है.

इससे पहले, मंगलवार की सुबह न्यायालय ने शिवराज सिंह चौहान और 9 अन्य भाजपा विधायकों की याचिका पर कमलनाथ
सरकार से बुधवार की सुबह साढ़े दस बजे तक जवाब मांगा था. विधानसभा अध्यक्ष द्वारा 16 मार्च को राज्यपाल के अभिभाषण के तुरंत बाद सदन की कार्यवाही 26 मार्च तक के लिए स्थगित किए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा के नौ विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.

बीजेपी ने इस याचिका में अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और विधान सभा के प्रधान सचिव पर संविधान के सिद्धांतों का उल्लंघन करने
और जानबूझ कर राज्यपाल के निर्देशों की अवहेलना करने का आरोप लगाया था. राज्यपाल लालजी टंडन ने शनिवार की राहत
मुख्यमंत्री को संदेश भेजा था कि विधान सभा के बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण के तुरंत बाद सदन में विश्वास मत
हासिल किया जाये क्योंकि उनकी सरकार अब अल्पमत में है.