नई दिल्लीः लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति समुदायों को दिए गए आरक्षण को दस वर्ष बढ़ाने के प्रावधान वाला संविधान (126वां संशोधन) विधेयक, 2019 सोमवार को निचले सदन में पेश किया गया.कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विधेयक पेश किया.

इससे पहले विधेयक पेश किये जाने का विरोध करते हुए तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने कहा कि यह असंवैधानिक प्रवृत्ति का विधेयक है. इसमें संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन किया गया है जो सभी को समानता का अधिकार देता है. उन्होंने आरोप लगाया कि विधेयक के माध्यम से सदन में रातों-रात एंग्लो-इंडियन समुदाय के सदस्यों का प्रतिनिधित्व समाप्त किया जा रहा है जो ठीक नहीं होगा. 70 साल से इस समुदाय के दो सदस्य सदन में प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं.

इस पर कानून मंत्री प्रसाद ने कहा कि इस संविधान संशोधन के माध्यम से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के सदन में आरक्षण को 10 वर्ष बढ़ाया जा रहा है जो समाप्त होने जा रहा है. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और एंग्लो-इंडियान समुदाय को पिछले 70 वर्ष से मिल रहा आरक्षण 25 जनवरी, 2020 को समाप्त हो रहा है.

उन्होंने कहा कि जहां तक एंग्लो-इंडियान समुदाय की बात है तो 2011 की जनगणना के अनुसार देश में इस समुदाय के केवल 296 सदस्य हैं. प्रसाद ने कहा कि इस समुदाय के बारे में विचार करना बंद नहीं हुआ है. इसके बाद उन्होंने सदन में विधेयक पेश किया.

(इनपुट भाषा)