नई दिल्ली:  सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी दिल्ली में अधिकारों पर जंग जारी हैं. एक बार फिर एलजी अनिल बैजल और सीएम केजरीवाल के बीच ठन गई है. मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर पलटवार करते हुए दिल्ली के उप राज्यपाल ने शुक्रवार को कहा कि ”सेवाओं’ को दिल्ली विधानसभा के अधिकार क्षेत्र के बाहर बताने संबंधित गृह मंत्रालय की 2015 की एक अधिसूचना अभी तक वैध है. केजरीवाल को लिखे पत्र में बैजल ने कहा कि सेवाओं के मामले एवं अन्य मुद्दों पर ‘और स्पष्टता’ तभी आएगी जब सुप्रीम कोर्ट की नियमित पीठ ऐसी लंबित अपीलों पर अंतिम फैसला नहीं दे देती है. वहीं, सीएम केजरीवाल ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलने का समय मांगा, जिससे कि वह दिल्ली में सत्ता टकराव पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का आग्रह कर सकें. केजरीवाल ने कहा कि यह बहुत खतरनाक है कि केंद्र सरकार उपराज्यपाल को दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच सत्ता टकराव पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन न करने की सलाह दे रही है.

सेवा का क्षेत्र बना विवाद का मुद्दा
उपराज्यपाल के अधिकारों को सीमित करने के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद दिल्ली सरकार एवं एलजी कार्यालय के बीच विवाद का कारण सेवा विभाग बना हुआ है. बैजल का यह बयान ऐसे समय में आया है, जबकि आज दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कुछ समय पहले कहा था कि उपराज्यपाल ने सेवा विभाग का नियन्त्रण राज्य सरकार को सौंपने से मना कर दिया है.

उप राज्यपाल ने गृह मंत्रालय अधिसूचना का दिया हवाला
केजरीवाल को लिखे एक पत्र में बैजल ने गृह मंत्रालय की 2015 की एक अधिसूचना के बारे में ध्यान दिलाया, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 239 और 239 एए के तहत राष्ट्रपति निर्देश जारी होते हैं. इसमें कहा गया कि ‘सेवाएं’ दिल्ली विधानसभा के अधिकारक्षेत्र के बाहर हैं, परिणामस्वरूप दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार के पास ‘सेवाओं’ को लेकर कोई कार्यपालिका अधिकार नहीं हैं.

ये भी लिखा पत्र में
पत्र में कहा गया, ”इस अधिसूचना को दिल्ली उच्च न्यायालय ने चार अगस्त 2016 के अपने एक आदेश में भी सही ठहराया था.” उपराज्यपाल ने कहा, ”माननीय सुप्रीम कोर्ट के पीछे के निर्णय के चलते गृह मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि निर्णय के अंतिम पैरा के अनुसार ‘सेवा’ सहित नौ अपील पर नियमित पीठ सुनवाई करेगी और गृह मंत्रालय की 21 मई 215 की अधिसूचना वैध बनी रहेगी.” एलजी कार्यालय ने एक बयान में कहा, ”उपराज्यपाल मुख्यमंत्री का ध्यान पैरा 249 की ओर आकर्षित कर रहे हैं, जहां सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का ढांचा इस तरह का है जिसमें एक तरफ मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद और दूसरी तरफ एलजी एक टीम की तरह है.”

सुप्रीम कोर्ट का फैसला केंद्र ने मानने से मना किया
केजरीवाल ने दावा किया कि यह देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानने से स्पष्ट रूप से मना कर दिया है. बैजल के साथ 25 मिनट तक हुई बैठक के बाद केजरीवाल ने कहा कि उपराज्यपाल के मना करने के बाद देश में अराजकता फैल जाएगी.

राशन आपूर्ति पर राज्यपाल ने किया ऐतराज
इससे पहले शुक्रवार को दिन में केजरीवाल ने सभी आपत्तियों को दरकिनार करते हुए राशन की लोगों के घरों तक आपूर्ति को मंजूरी दी थी. मुख्यमंत्री ने खाद्य विभाग को यह भी आदेश दिया कि योजना को तुरंत लागू किया जाए. बैजल ने दिल्ली सरकार की इस योजना पर आपत्ति जताई थी और आप सरकार से कहा था कि इसे लागू करने से पहले केंद्र से विचार विमर्श किया जाए.
केजरीवाल ने राजनाथ से मिलने का समय मांगा
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने शुक्रवार को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलने का समय मांगा, जिससे कि वह दिल्ली में सत्ता टकराव पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का आग्रह कर सकें. सीएम केजरीवाल ने कहा कि यह बहुत खतरनाक है कि केंद्र सरकार उपराज्यपाल को दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच सत्ता टकराव पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन न करने की सलाह दे रही है. उन्होंने ट्वीट किया, ”गृह मंत्रालय ने उपराज्यपाल को सलाह दी है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के उस हिस्से को नजरअंदाज करें, जो उपराज्यपाल की शक्तियों को केवल तीन विषयों तक सीमित करता है. यह खतरनाक है कि केंद्र सरकार उपराज्यपाल को माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों का पालन न करने की सलाह दे रही है.”
केंद्र ने सिर्फ केजरीवाल सरकार से छीने संवैधानिक अधिकार : आप
आप ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश में दिल्ली सरकार के संवैधानिक अधिकार बहाल करने के बावजूद उपराज्यपाल अनिल बैजल द्वारा प्रशासनिक अधिकार सरकार को नहीं सौंपने पर आप के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली की सभी पूर्ववर्ती सरकारों के मुख्यमंत्रियों को एक समान संवैधानिक अधिकार मिले थे, लेकिन केजरीवाल सरकार के वजूद में आते ही केंद्र सरकार ने मुख्यमंत्री के अहम अधिकारों में कटौती करना शुरू कर दिया.

 जनता से किए गए वादे पूरे नहीं करने दे रहा केंद्र
आप प्रवक्ता भारद्वाज ने कहा, आप सरकार के बनने के बाद संविधान की विशेष व्याख्या करके, केंद्र सरकार ने द्वेषभाव से दिल्ली सरकार के अधिकार हड़प लिए. अब जबकि सर्वोच्च अदालत ने साफ कर दिया है कि उपराज्यपाल के अधिकार सीमित हैं, फिर भी उपराज्यपाल निर्वाचित सरकार के अधिकारों को हड़प कर बैठे हैं. आप नेता ने कहा कि दिल्ली के अधिकारों की लड़ाई के कारण साढ़े तीन साल तक दिल्ली सरकार को काम नहीं करने दिया गया. बचे हुए डेढ़ साल के कार्यकाल में अगले साल लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण काम नहीं हो पाएगा. इससे साफ है कि केंद्र सरकार योजनाबद्ध तरीके से दिल्ली सरकार को जनता से किए गए वादे पूरे नहीं करने देने के लिए उपराज्यपाल और अधिकारियों के माध्यम से बाधाए पैदा कर रही है.  (इनपुट-एजेेंसी)