नई दिल्ली: दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफर-उल-इस्लाम खान ने सोशल मीडिया पर उनके ‘विवादित’ पोस्ट मामले की जांच कर रही पुलिस टीम को रविवार को अपना लैपटॉप सौंप दिया. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. Also Read - दिल्ली में कोरोना का नया रिकॉर्ड, 1 दिन में 1163 नए मामले सामने आए

उन्होंने कहा कि वसंत कुंज के एक निवासी की शिकायत पर खान के खिलाफ 30 अप्रैल को भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए और 153ए के तहत मामला दर्ज किया गया था. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि खान को ‘विवादित’ सोशल मीडिया पोस्ट करने में इस्तेमाल किया गया अपना लैपटॉप सौंपने के लिये अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 91 के तहत नोटिस भेजा गया था. Also Read - पायलट को हुआ कोरोना, मास्को जा रहा एयर इंडिया का विमान आधे रास्ते से दिल्ली लौटा

खान ने फोन पर बताया, ‘मुझे ट्विटर और फेसबुक पोस्ट करने में इस्तेमाल किये गए लैपटॉप को जमा करने के लिए शनिवार को दिल्ली पुलिस का नोटिस मिला. मैंने आज अपना लैपटॉप पुलिस को सौंप दिया. Also Read - कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली में कंटेनमेंट जोन में इजाफा, 100 के पार पहुंची संख्या

लेकिन, मैंने लिखित रूप से कहा है कि मैं दबाव में यह सब कर रहा हूं, क्योंकि लैपटॉप में ट्वीट या सोशल मीडिया पोस्ट का कोई रिकॉर्ड नहीं है और यह केवल ऑनलाइन है. इसके अलावा, मुझे समझ में नहीं आया कि उन्होंने मेरा लैपटॉप क्यों मांगा, क्योंकि मैंने स्वीकार किया है कि मैंने ट्वीट लिखा था और अभी भी उस बात पर कायम हूं.’

इससे पहले रविवार को पुलिस की तरफ से जफरुल इस्लाम खान को नोटिस दी गई थी कि वे अपना लैपटाप और मोबाइल जमा करें. इसके लिए उन्हें पुलिस द्वारा 12 मई तक का समय भी दिया गया था.

बता दें यह पूरा विवाद जफरुल इस्लाम खान द्वारा सोशल मीडिया पर किए एक विवादित पोस्ट के चलते शुरू हुआ था. जफरुल इस्लाम ने फेसबुक पर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि जिस दिन मुसलमान अरब देशों से अपने खिलाफ हो रहे जुल्मों की शिकायत कर देंगे ना, पूरी दुनिया में सैलाब आ जाएगा.