नई दिल्ली: भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर ने विवादित बयान दिया है. चंद्रशेखर ने कहा कि जिस दिन देश के संविधान पर आंच आई, उस दिन भीमा कोरेगांव दोहरा देंगे. बता दें कि महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव में हिंसा हुई थी. एक जनवरी, 2018 को महाराष्ट्र के पुणे जिले में भीमा कोरेगांव युद्ध की 200वीं बरसी के दौरन हिंसा हो गई थी. चंद्रशेखर ने इसी तरह की हिंसा दोहराने की बात कही है.

चंद्रशेखर ने कहा कि लोगों से सही तरीके से वोट करने की अपील की. उन्होंने कहा कि वोट देने से पहले रोहित की शहादत याद रखना. अत्याचारी, अत्याचारी होता है. वो कभी तुम्हारा हितैषी नहीं हो सकता है. इसलिए मैंने कहा भीमा कोरेगांव दोहरा देंगे, हालाँकि अभी उसी की ज़रूरत नहीं है. जिस दिन देश के संविधान पे आंच आई, भीमा कोरेगांव दोहरा देंगे. बता दें कि एक दिन पहले ही कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी चंद्रशेखर का हाल-चाल लेने पहुंची थीं. चंद्रशेखर बीमार थे. चंद्रशेखर से प्रियंका मुलाकात के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं. प्रियंका से मिलने के एक बाद ही चंद्रशेखर ने ऐसा बयान दिया है.


ये है भीमा-कोरेगांव का इतिहास
इतिहास पर नजर डालें तो जनवरी 1818 में ब्रिटिश इंडियन आर्मी और पेशवाओं की सेना में जंग हुई थी. माना जाता है कि अंग्रेजों की ओर से जिन लोगों ने पेशवाओं को हराया, वे महार जाति से ताल्लुक रखते थे. ऐसा भी कहा जाता है कि महार समाज ने अपने ऊपर हो रहे अन्याय के खिलाफ इस जंग में लड़ाई लड़ी थी.

बताया जाता है कि पेशवा शासक महारों से सही रूप में बर्ताव नहीं करते थे. कुछ इतिहासकार बताते हैं कि महारों को अपनी कमर में एक झाड़ू बांधकर चलना होता था ताकि उनके पैरों के निशान झाड़ू से मिटते चले जाएं.

ऐसा भी कहा जाता है कि उस जमाने में दलितों के साथ बहुत भेदभाव होता था. इसी से दलित समाज के लोग नाराज थे और उन्होंने ऐसा माना जाता है कि अंग्रेजों की ओर से जिन लोगों ने पेशवाओं को हराया, वे महार जाति से ताल्लुक रखते थे. वे मानते हैं कि पेशवाओं की ‘ब्राह्मणवादी सत्ता’ के खत्म करने के लिए महार जाति के लोगों ने जंग लड़ी और हर साल 1 जनवरी को पुणे जिले में भीमा कोरेगांव जाते हैं. पिछले साल इसी जश्न के दौरान जातीय हिंसा हुई थी.