कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 70 प्रतिशत से अधिक अल्पसंख्यक छात्रों वाले सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन के वास्ते भोजन कक्षों के निर्माण का निर्देश देने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. भाजपा और अन्य विपक्षी दलों ने तृणमूल कांग्रेस पर राज्य में सांप्रदायिक भेदभाव करने का आरोप लगाया. हालांकि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इससे इनकार किया है. मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि यह एक पुराना परिपत्र है जिसे काफी पहले वापस ले लिया गया था लेकिन किसी गुमराह अधिकारी ने उसे जारी कर दिया. यह मामला तब प्रकाश में आया जब भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने इसपर राज्य की ममता सरकार को घेरा. उनके ट्वीट के बाद इसपर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई, चारों तरफ से इसको लेकर प्रतिक्रियाएं आने लगी. Also Read - WB Polls 2021: ममता बनर्जी से मिले Tejashwi Yadav, बंगाल चुनाव में TMC के समर्थन का किया ऐलान

दिलीप घोष ने कूच बिहार जिले में 70 प्रतिशत से अधिक अल्पसंख्यक छात्र वाले सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन के वास्ते भोजन कक्षों के निर्माण का निर्देश देने के लिए राज्य सरकार की निंदा की. उन्होंने सवाल खड़ा किया कि क्या इस कदम के पीछे कोई ‘‘नापाक मकसद’’ है. घोष ने अपने ट्विटर हैंडल पर परिपत्र की एक प्रति अपलोड करते हुए लिखा, ‘‘पश्चिम बंगाल सरकार ने एक परिपत्र जारी किया है जिसके तहत उसने स्कूल प्रशासन को निर्देश दिये हैं कि जिन विद्यालयों में 70 प्रतिशत या उससे अधिक छात्र मुस्लिम समुदाय के हैं, उनके लिए एक अलग भोजन कक्ष बनाने के साथ ही बैठने की व्यवस्था की जाए.’’ इस संबंध में किसी भी सरकारी अधिकारी से तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है. Also Read - West Bengal Assembly Elections 2021 Opinion Poll: बंगाल में फिर एक बार ममता सरकार! लेकिन 3 से 100 पर पहुंच सकती है भाजपा; जानिए क्या है जनता का मूड

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उन्होंने पूछा, ‘‘धर्म के आधार पर छात्रों के बीच यह भेदभाव क्यों? क्या इस भेदभाव वाले कदम के पीछे कोई बदनीयती छुपी है? एक और साजिश?’’ इस मुद्दे पर पलटवार करते हुए, सत्तारूढ़ टीएमसी ने शुरू में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हवाले से एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया था कि यह एक पुराना परिपत्र है जिसे पहले ही वापस ले लिया गया है, लेकिन बाद में कहा गया कि वे एक नया स्पष्टीकरण जारी करेंगे.

राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अब्दुल मन्नान ने आदेश पर राज्य सरकार की आलोचना की और कहा कि सिर्फ धर्म के आधार पर छात्रों को अलग नहीं किया जा सकता. माकपा के वरिष्ठ नेता सुजान चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘छात्रों के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता है. यदि भोजन कक्ष बनाया जा रहा है तो यह सभी के लिए होना चाहिए. हम इस तरह के कदम की निंदा करते हैं.’’ घोष ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार केवल राज्य में मुसलमानों के विकास के लिए काम करने में रुचि रखती है.

उन्होंने कहा, ‘‘तृणमूल सरकार केवल अपने वोट बैंक को सुरक्षित करने के लिए, अल्पसंख्यकों के विकास के लिए काम करने में रुचि रखती है, हिंदू छात्रों ने क्या गलत किया है कि वे भोजन कक्ष की सुविधा का लाभ नहीं उठा सकते.’’ बनर्जी ने राज्य विधानसभा में अपने कक्ष में पत्रकारों से कहा, ‘‘यह एक पुराना परिपत्र है जिसे पहले ही वापस ले लिया गया है. मुझे लगता है कि किसी गुमराह अधिकारी ने एक पुराने परिपत्र को निकाल कर उसे सरकार के संज्ञान के बिना जारी कर दिया.’’

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हालांकि उन्होंने कहा कि उन्हें यह याद नहीं है कि अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग द्वारा कब परिपत्र को जारी किया गया था और कब वापस लिया गया था. बनर्जी ने जोर देकर कहा कि यह भेदभावपूर्ण नहीं है. उन्होंने कहा कि इसका मकसद यह उन स्कूलों का पता लगाना था है जहां अल्पसंख्यक छात्र बड़ी संख्या में है, ताकि उन्हें विकास निधि का लाभ मिल सके.

उन्होंने कहा, ‘‘यह भारत सरकार का दिशानिर्देश है. हम इसका अनुसरण कर रहे हैं. यह एक तकनीकी मामला है, इससे ज्यादा कुछ नहीं है.’’ उन्होंने जोर देकर कहा, ‘‘यह छात्रों को किसी भी तरह से विभाजित करने के लिए नहीं है. यह उन स्कूलों के लिए होना है जिनके पास भोजन कक्ष नहीं हैं, उन स्कूलों के लिए जहां छात्रों को खुले में खाना पड़ता है. यह सभी के लिए है.’’ हालांकि, तृणमूल के वरिष्ठ नेता और अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री गियासुद्दीन मुल्ला ने आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और यह कहते हुये इस फैसले का बचाव किया कि इससे सभी छात्रों को फायदा होगा.

मंत्री गियासुद्दीन मुल्ला ने यहां कहा, ‘‘हमारा विभाग सभी छात्रों के समग्र विकास के लिए अल्पसंख्यक बहुल सामान्य संस्थानों के बुनियादी ढांचे को उन्नत करने के लिए काम कर रहा है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मध्याह्न भोजन के लिए बनने वाले भोजन कक्ष से सभी छात्रों को फायदा होगा, न कि केवल मुसलमानों को. धनराशि स्वीकृत हो गई है इसलिए हमने ऐसे स्कूलों की सूची मांगी है.’’ केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने पश्चिम बंगाल सरकार के इस कदम को अल्पसंख्यक समुदाय के लिए ‘‘तुष्टिकरण की पराकाष्ठा’’ बताते हुए कड़ा विरोध जताया. उन्होंने एक टीवी चैनल से कहा, ‘‘ममता बनर्जी अल्पसंख्यक समुदाय के लिए सबसे ज्यादा तुष्टिकरण कर रही हैं. वह उन लोगों को बर्दाश्त नहीं कर सकतीं, जो ‘श्री राम’ का नारा लगाते हैं, लेकिन रोहिंग्या घुसपैठिए उन्हें स्वीकार हैं.’’