नई दिल्ली। आईएसआई के पूर्व प्रमुख असद दुर्रानी का कहना है कि मुम्बई हमले के षडयंत्रकर्ता और प्रतिबंधित जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद पर मुकदमा चलाने की कीमत बहुत बड़ी है. उन्होंने कहा कि अगर आप सईद पर मुकदमा चलाते हैं तो पहली प्रतिक्रिया होगी. यह भारत की ओर से है, आप उसे परेशान कर रहे हैं, वह निर्दोष है, आदि आदि, राजनीतिक कीमत बहुत बड़ी है. दुर्रानी ने एक नई किताब में ऐसा कहा है जिसमें उनकी पूर्व रॉ प्रमुख ए एस दुलत के साथ बातचीत है. दोनों भारत पाकिस्तान संबधों में हर विषय चर्चा करते हैं जिनमें सर्जिकल स्ट्राइक, कुलभूषण जाधव, नवाज शरीफ, कश्मीर और बुरहान वानी आदि शामिल हैं. बता दें कि इसी किताब को लेकर पाक फौज ने दुर्रानी को तलब किया है. Also Read - काबुल में आतंकी ने गुरुद्वारे में घुसकर हमला किया, चार की मौत

हाफिज सईद पर सवाल-जवाब Also Read - 26/11 हमले में शहीद मेजर पर बन रही इस फिल्म में दिखेंगी यह एक्ट्रेस, पहले भी निभा चुकी हैं अहम किरदार

जब दुलत पूछते हैं कि पाकिस्तान के लिए सईद का क्या महत्व है, तो दुर्रानी जवाब देते हैं, उस पर मुकदमा चलाने की कीमत बहुत बड़ी है. सईद पिछले साल जनवरी से नवंबर तक नजरबंद रहा था. उस पर आतंकवादी गतिविधियों में उसकी भूमिका को लेकर अमेरिका ने एक करोड़ डॉलर का इनाम घोषित कर रखा है. जमात उद दावा प्रतिबंधित लश्कर ए तैयबा का प्रमुख संगठन है और वही 2008 के मुंबई हमले के लिए जिम्मेदार है. इस हमले में छह अमेरिकियों समेत 166 लोगों की जान चली गई थी. Also Read - दो बीजेपी प्रवक्ताओं ने मुझे ISI, 26/11 से जोड़ा, मैं उन पर मानहानि का दावा करूंगा: दिग्विजय सिंह

मुंबई हमले के बाद अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने सईद को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था. उसे नवंबर , 2008 में नजरबंद किया गया था लेकिन कुछ ही महीने बाद अदालत ने उसे रिहा कर दिया था. दुर्रानी ने सईद को हिरासत में लेने के बारे में लिखा है, उसे अदालतों में ले जाया जाता था लेकिन उनके पास उसके खिलाफ (नया) कुछ नहीं होता था. अब भी संभव है कि विवाद की हवा निकालने के लिए उसे हिरासत में लिया जाए. छह महीने में वह बाहर आ सकता है.

हाफिज की नजरबंदी नाटक थी?

हार्पर कोलिंस इंडिया द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में दुलत और दुर्रानी की आदित्य सिन्हा से बातचीत हुई है. जब दुलत ने पूछा कि सईद की नजरबंदी बस एक नाटक था तो दुर्रानी ने कहा, जहां तक हाफिज सईद की बात है तो नई बात यह है कि (क्या) और सबूत उपलब्ध है? कोई भी उम्मीद लगा सकता है कि हाफिज सईद के साथ समझौता है. जब उनसे पूछा गया कि क्या सईद की नजरबंदी का भारत पाकिस्तान संबंधों पर कोई सकारात्मक परिणाम है, तो उन्होंने कहा, फिलहाल भारत पाकिस्तान संबंध मोर्चे पर बहुत ही कम सकारात्मक चीजें हैं. लेकिन इससे उस देश को एक बड़ी राहत मिल सकती है जो लगातार दबाव में है.

दुर्रानी पुस्तक में जिक्र करते हैं कि मुम्बई एक मात्र ऐसी घटना रही है जिसमें उन्होंने फैसला किया कि वह यह कहने के लिए किसी भी भारतीय और पाकिस्तान चैनल के सामने उपलब्ध होंगे कि जिस किसी ने यह हरकत की है, चाहे राज्य प्रायोजित हो, या आईएसआई प्रायोजित या सेना प्रायोजित , उसे पकड़ा जाना चाहिए और दंडित किया जाना चाहिए.

हेडली ने लिया था आईएसआई मेजर का नाम

उन्होंने कहा, बात बस यह नहीं है कि 168 लोग मरे थे , चार दिनों तक नरसंहार चला, आदि आदि. उस समय पाकिस्तान अपनी पूर्वी सीमा पर युद्ध की जहमत नहीं उठा सकता था. पश्चिम में और देश में ढेरों समस्याएं थीं. मैं नहीं जानता कि किसने यह किया, लेकिन कुछ सवाल थे जैसे डेविड हेडली ने एक आईएसआई मेजर का नाम लिया. उससे हमारे लिए मुश्किल खड़ी हो गई. इस खबर पर कि हेडली ने सईद के साथ साठगांठ की तो उन्होंने कहा कि लोग आगे बढ़ कर जांच कर सकते हैं क्योंकि इस तरह की खबरें आई हैं.

उन्होंने कहा, आठ सालों तक हम दोनों ने संयुक्त जांच, संयुक्त सुनवाई, खुफिया सूचनाओं के आदान प्रदान और आतंकवाद निरोधक प्रणाली पर सहमति की बस इस कारण वकालत की कि हम तबतक कुछ नहीं कर सकते जबतक ऐसा नहीं हो जाता. तब तक, हाफिज सईद, आईएसआई, जैश ए मोहम्मद: यह संभव है कि उनका इससे कोई लेना – देना नहीं हो, कि तीसरी , चौथी या पांचवीं पार्टी शामिल हो.

दुर्रानी को पाक सेना ने किया तलब

बता दें कि इस किताब को लेकर पाकिस्तान की प्रभावशाली सेना ने दुर्रानी पर सैन्य आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है और उन्हें उनकी किताब ‘द स्पाई क्रोनिकल्स: रॉ , आईएसआई एंड इल्यूजन ऑफ पीस’ को लेकर स्पष्टीकरण के लिए कल तलब किया है. किताब का विमोचन भारत में हुआ था लेकिन दुर्रानी को भारत आने के लिए वीजा नहीं दिया गया.

(भाषा इनपुट)