इलाहाबाद: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की 2018 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में नकल के खिलाफ सख्ती को देखते हुए चार दिन में 10,44,619 परीक्षार्थियों ने बीच में ही परीक्षा छोड़ दी है. परीक्षा बीच में छोड़ने वाले सबसे अधिक परीक्षार्थी आजमगढ़, देवरिया, गाजीपुर, हरदोई आदि जिलों से हैं. Also Read - UP Board Toppers:  बोर्ड एग्जाम में टॉप करने वाले छात्रों को योगी सरकार का गिफ्ट, 1 लाख रुपए-लैपटॉप और घर तक बनेगी पक्की सड़क

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की सचिव नीना श्रीवास्तव ने बताया कि इस साल काफी सख्ती की वजह से नकल के भरोसे परीक्षा पास करने वाले परीक्षार्थी हताश हैं और वे परीक्षा बीच में ही छोड़ रहे हैं. हर जिले में केंद्रों का निरीक्षण डीएम स्वयं कर रहे हैं और सभी 8,549 परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी से नजर रखी जा रही है. पिछले साल की तुलना में परीक्षा केंद्रों की संख्या घटाई गई है. इस साल कुल 8,549 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जबकि पिछले साल इनकी संख्या 11,715 थी. दूसरी ओर, इस साल परीक्षार्थी बढ़े हैं. यूपी बोर्ड की इस साल की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की परीक्षा में 66,37,018 परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं. Also Read - UP Board Result 2018: राज्य के 150 स्कूलों में एक भी छात्र नहीं हो सका पास

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के अपर सचिव (प्रशासन) शिव लाल ने बताया कि परीक्षा के प्रथम दिन 1,80,826 परीक्षार्थियों ने बीच में ही परीक्षा छोड़ दी, जबकि दूसरे दिन यह संख्या बढ़कर 2,14,265 और तीसरे दिन 6,33,217 पहुंच गई। शुक्रवार को परीक्षा के चौथे दिन ऐसे परीक्षार्थियों की संख्या बढ़कर 10,44,619 पहुंच गई. परीक्षा छह फरवरी से प्रारंभ हुई है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की तरह परीक्षा प्रणाली को लेकर बहुत सख्त हैं. परीक्षा नकल विहीन हो, इसको लेकर पूरा तंत्र सक्रियता के साथ काम कर रहा है. Also Read - Uttar Pradesh secondary education department to conduct UP board exams class 10th and 12th from March 16 | 16 मार्च से 21 अप्रैल तक चलेंगी यूपी बोर्ड की परीक्षाएं, बढ़ सकती है चुनाव की तारीख

उल्लेखनीय है कि वर्ष 1992 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और शिक्षा मंत्री राजनाथ सिंह नकल विरोधी अध्यादेश लाए थे. इसके तहत परीक्षा में नकल को गैर जमानती अपराध की श्रेणी में डाला गया था. परीक्षा में नकल करते बड़ी संख्या में पकड़े गए विद्यार्थियों को जेल भी जाना पड़ा था.