नई दिल्ली: कभी बॉस रात में ज़रूरी काम के बहाने वीडियो कॉल करते हैं. कभी बार ऑनलाइन मीटिंग (Online Meeting) में ऐसे कपड़े पहन कर बैठते हैं, जिससे काम कर वालीं सहकर्मी महिलाओं के लिए असहज स्थिति बन जाती है. कभी दोस्त बन जाने की रिक्वेस्ट करते हैं तो कभी किसी भी समय फोन कर के कहते हैं कि उन्हें अपने बच्चों के कारण काम करने में दिक्कत तो नहीं है? वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) कोरोना से बचाव के लिए ज़रूरी बना हुआ है. वहीं, इस बीच महिलाओं को अलग तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. देश की राजधानी दिल्ली में घर से ही काम करने वालीं महिलाएं इस मुश्किल से गुज़र रही हैं. मुश्किल इतनी है कि महिलाओं को यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) हो रहा है या नहीं, या इससे कैसे निपटा जाए, के लिए विशेषज्ञों से सलाह लेने लगी हैं.Also Read - Himachal Pradesh lockdown Update: हिमाचल प्रदेश में फिर लगेगा सख्त लॉकडाउन! मुख्यमंत्री बोले- कैबिनेट बैठक में लेंगे फैसला

विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाएं ऑनलाइन हो रहे इस यौन उत्पीड़न को लेकर परेशान हैं और वे समझ नहीं पातीं कि जो कुछ हो रहा है, वह यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आता है या नहीं, और अगर आता है तो घर से काम करते समय इसकी शिकायत कैसे करें. ‘आकांक्षा अगेंस्ट हरासमेंट’ नामक संगठन की प्रभारी आकांक्षा श्रीवास्तव बताती हैं कि ‘‘कंपनियों की ओर से इस बारे में कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं कि संगठन में घर से काम कैसे होना चाहिए और यह महिलाओं को भ्रमित करता है. मुझे लॉकडाउन लागू होने के बाद से हर रोज इस तरह के उत्पीड़न की चार-पांच शिकायत मिल रही हैं.’’ Also Read - Tamil Nadu Lockdown Update: कोयंबटूर में सोमवार से लागू होंगे नए कोविड प्रतिबंध, जानिए क्या हैं नए नियम

हालांकि, लॉकडाउन शुरू होने के बाद से राष्ट्रीय महिला आयोग को इस तरह की कम शिकायत मिली हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह इस वजह से हो सकता है क्योंकि महिलाएं आधिकारिक रूप से शिकायत नहीं करना चाहतीं और वे परामर्श लेना चाहती हैं कि वे मामले में क्या कर सकती हैं. Also Read - Kerala Lockdown Latest Update: केरल में कोरोना का कहर जारी, आज से लगा है सख्त वीकेंड लॉकडाउन

आकांक्षा श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘लॉकउाउन के दौरान अनेक महिलाएं अपनी नौकरी की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, इसलिए वे सुनिश्चित नहीं हैं कि उन्हें आवाज उठानी चाहिए या नहीं.’’ उन्होंने कहा कि घर से काम करने का मतलब है कि थोड़ी परेशानी होगी और किसी को भी इसे स्वीकार करना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा और इससे महिलाओं के लिए अधिक तनाव उत्पन्न हो रहा है. उन्होंने उदाहरण देकर कहा कि एक महिला को हाल में उसके ‘बॉस’ ने आवश्यक काम के बहाने रात में 11 बजे फोन किया, लेकिन जब बात हुई तो ऐसा कोई जरूरी काम नहीं था. उसने ऐसे काम के बारे में बात की जो आसानी से मेल के जरिए हो सकता था.

एक अन्य मामले में एक महिला को उसके ‘बॉस’ ने वीडियो कॉल कर पूछा कि क्या वह दिए गए काम को घर से करने में सक्षम है क्योंकि वह पीछे अपने बच्चों के खेलने से ‘‘परेशान’’ दिख रही थी. महिलाओं के लिए कार्यस्थलों पर सुरक्षा और काम का उपयुक्त माहौल सुनिश्चित करने के लिए यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून 2013 लागू किया गया था. इसमें कार्यस्थल की पहचान कर्मचारियों से संबंधित स्थल और नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराए जानेवाले परिवहन के रूप में की गई थी. इतना ही नहीं इन कामकाजी महिलाओं को सोशल मीडिया पर पीछा करने और ऐसे व्यक्तियों द्वारा उनकी तस्वीरों पर टिप्पणी किए जाने जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है जो उनकी मित्र सूची में शामिल नहीं हैं. उन्हें अनावश्यक रूप से ‘मित्रता अनुरोध’ भेजे जाने जैसी समस्या से भी जूझना पड़ रहा है.

इन्फोसेक गर्ल्स संगठन की एक विशेषज्ञ ने कहा कि बहुत से लोग शिकायत नहीं करते, लेकिन वे जानना चाहते हैं कि ऐसी स्थिति में क्या किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि कई बार लोगों को यह अहसास नहीं रहता कि कॉल पर महिलाएं हैं और वे जानबूझकर या अनजाने में अनुचित शब्दों का इस्तेमाल करते हैं. विशेषज्ञ ने कहा कि जब हर कोई घर पर है तो लोग किसी भी समय कॉल करते हैं, बैठक करते हैं. महिलाओं के लिए यह असुविधाजनक हो सकता है और परिवार के साथ संतुलन स्थापित करने से जुड़ा मुद्दा भी हो सकता है.