नई दिल्ली: कोरोना वायरस की चपेट में आने के बाद मरीजों को सांस में लेने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है. ऐसे में ऑक्सीजन की आपूर्ति डॉक्टर ऑक्सीजन सिलिंडर से करने की कोशिश करते हैं लेकिन कई बार इसमें भी तमाम तरह की समस्याएं देखने को मिलती है. ऐसे में भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा एक अनोखी डिवाइस बनाई गई है. इस डिवाइस के जरिए कोरोना संक्रमितों को भरपूर ऑक्सीजन युक्त हवा मिल सकेगी. इस डिवाइस को भारत में ही बनाया गया है. यह पूरी तरह स्वदेशी डिवाइस है. इसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) से मिली आर्थिक मदद से जेनरिच मेम्ब्रेन्स नामक कंपनी ने बनाया है. इस मशीन का नाम मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेटर रखा गया है. यह मशीन ऑक्सीजन की संख्या में 35 प्रतिशत तक ऑक्सीजन बढ़ाती है. Also Read - महाराष्‍ट्र में कोरोना से आज 85 मौतें के साथ अब तक करीब 2000 मृत, कुल 60 हजार पॉजिटिव केस

यह डिवाइस सुरक्षित है. इसे चलाने के लिए ट्रेंड स्टाफ की भी जरूरत नहीं होती. इसकी देखरेख में भी ज्यादा सावधानी नहीं बरतनी होती. यह पोर्टेबल होता है यानी इसे कहीं भी लगाकर चला सकते हैं. खास बात है कि यह किसी भी जगह तेजी से भरपूर ऑक्सीजन से युक्त हवा उपलब्ध कराती है. इस उपकरण में मेम्ब्रेन काटिर्र्ज, तेल मुक्त कम्प्रेशर, आउटपुट फ्लोमीटर, ह्युमिडिफायर बोतल, नासल कैनुला और ट्यूबिंग व फिटिंग्स शामिल हैं. साफ हवा को मेम्ब्रेन काटिर्र्ज में भरा जाता है, जो भारी दबाव के साथ नाइट्रोजन की तुलना में ऑक्सीजन की प्रचुर मात्रा वाली ऑक्सीजन की सप्लाई करता है. मेम्ब्रेन काटिर्र्ज कुल मिलाकर ऑक्सीजन और नाइट्रोजन में अंतर करने में सक्षम है, जो वायरस, बैक्टीरिया और कणयुक्त तत्वों को गुजरने से रोकता है. Also Read - ICC Meeting: टी20 विश्‍व कप 2020 के भविष्‍य को लेकर फैसला 10 जून तक स्‍थगित

डीएसटी सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा के मुताबिक, “कोविड-19 सहित अन्य मरीजों के लिए चिकित्सा ग्रेड से ऑक्सीजनयुक्त हवा की जरूरत होती है. वैश्विक अनुभव से सामने आया है कि लगभग 14 प्रतिशत संक्रमण के मामले में ही ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत होती है और जिसमें 4 प्रतिशत को ही आईसीयू आधारित वेंटिलेटरों की जरूरत होती है. इस डिवाइस के जरिए संक्रमित मरीजों की सांस से जुड़ी समस्याओं का बेहतर इलाज किया जा सकता है.” Also Read - दिल्‍ली एम्स में अभी तक 195 स्वास्थ्यकर्मी कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं, 2 की जान गई

कोविड 19 के प्रमुख लक्षणों में सांस फूलने की भी समस्या है. ऐसे में इस डिवाइस का इस्तेमाल उन मरीजों के लिए किया जा सकता है, जिन्हें गहन देखभाल इकाइयों (आईसीयू) से डिस्चार्ज कर दिया गया है. यह डिवाइस क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज (सीओपीडी), अस्थमा, इंटर्सटिशियल लंग डिसीज (आईएलडी), समय पूर्व जन्मे बच्चों, सांप काटने जैसी बीमारियों से प्रभावित मरीजों के लिए भी खासी मददगार हो सकती है. खास बात है कि इस डिवाइस का परीक्षण और इसे मान्यता देने का काम पूरा हो गया है.