नई दिल्ली: कोरोना के स्वदेशी टीके कोवैक्सीन को लेकर सोशल मीडिया पर तमाम तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं. उन अफवाहों में से एक है कि इस वैक्सीन में गाय के नवजात बछड़े के खून को मिलाया गया है. सोशल मीडिया पर कोवैक्सीन को लेकर इस तरह के कई दावे किए जा रहे हैं. इन दावों को खारिज करते हुए केंद्र सरकार ने कहा है कि तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया है. स्वास्थ्य मंत्रालय के बयान के मुताबिक नवजात बछड़े के सीरम का इस्तेमाल केवल वेरो सेल्स को तैयार करने और विकसित करने के लिए किया जाता है.Also Read - केंद्र ने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई के लिए राज्यों को 1828 करोड़ रुपये दिए

बता दें कि कांग्रेस पार्टी के सोशल मीडिया विभाग के राष्ट्रीय संयोजक गौरव पंथी ने एक RTI जवाब का हवाला देते हुए ट्वीट कर आरोप लगाया कि कोवैक्सीन बनाने के लिए 20 दिन के बछड़े की हत्या की जाती है. मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि दुनियाभर में वीरो सेल्स की ग्रोथ के लिए अलग अलग तरह के गोवंश और अन्य जानवरों के सीरम का इस्तेमाल किया जाता रहा है. यह एक ग्लोबल मानक प्रक्रिया है. Also Read - COVID19 Cases Update: देश में लगतार चौथे दिन कोरोना के सक्रिय मरीज बढ़े, आज 41,649 नए केस दर्ज हुए

मंत्रालय ने कहा कि वीरो सेल्स को डिवलेप किए जाने के बाद कई बार पानी और केमिकल्स से धोया जाता है. इस प्रक्रिया को बफर कहते हैं. इसके बाद वेरो सेल्स को वायरल ग्रोथ के लिए कोरोना वायरस से संक्रमित कराया जाता है. इस प्रक्रिया मेम वेरो सेल्स पूरी तरह नष्ट हो जाता है. इसके बाद नए वायरस को निष्क्रिय किया जाता है. इस खत्म हुए वायरस का इस्तेमाल ही वैक्सीन के निर्माण में दोबारा किया जाता है. अंतिम राउंड में बछड़े के सीरम का इस्तेमाल गलत साबित होती है. Also Read - चीन में फिर बढ़ा कोरोना का खतरा, बीजिंग समेत कई शहरों में तेजी से फैल रहा डेल्टा वेरिएंट