नई दिल्ली: कोरोना वायरस से पूरा देश पीड़ित है. कुछ ही ऐसे जिले हैं जहां कोरोना का कोई मामला अबतक सामने नहीं आया है. ऐसे में रैपिड एंटीबॉडी टेस्टिंग किट की राज्यों में भारी मांग के बीच केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को रैपिड टेस्टिंग किट उपलब्ध करवाया जिसपर राजस्थान और पश्चिम बंगाल सरकार सवाल खड़ा कर चुकी है. इसके तुरंत बाद हरियाणा सरकार ने इस टेस्टिंग किट पर सवाल खड़ा करते हुए बताया है कि यह किट बहुत ज्यादा ही महंगा पड़ रहा है. Also Read - 31 मई के बाद दिल्ली में खुल जाएंगे धार्मिक स्थल और मॉल में दुकानें! दिल्ली सरकार ने दिए संकेत

हरियाणा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने एक अखबार को दिए अपने बयान में बताया है कि चीन से राज्य सरकार ने रैपिड किट मंगवाने का फैसला किया था. लेकिन कोरोना रैपिड टेस्टिंग किट हमें बहुत ही ज्यादा महंगा पड़ रहा है. इस वजह से राज्य सरकार ने चीन के ऑर्डर को कैंसल कर उत्तर कोरिया के एक कंपनी से इस किट को खरीदने का फैसला किया है. उन्होंने बताया कि कोरियाई कंपनी की तरफ से हमें 25 हजार रैपिड टेस्टिंग किट मिल भी चुका है. Also Read - कोरोना का प्रभाव! वित्त वर्ष 2019-20 की चौथी तिमाही में 3.1 प्रतिशत रही देश की जीडीपी

बता दें कि हरियाणा स्थित मानेसर में एक कोरियाई कंपनी टेस्टिंग किट को मात्र 380 रुपये में उपलब्ध करा रही है. वहीं चीन से आने वाली किट की कीमत 780 रुपये थी. दोनों के दामों के बीच दोगुने का अंतर है. इस कारण सरकार ने चीन के ऑर्डर को रद्द कर दिया है. बता दें कि कोरियाई कंपनी का कहना है कि अगले एक महीने में कंपनी 1 करोड़ रैपिड टेस्टिंग किट बना सकती है. इस टेस्टिंग किट को ICMR ने मंजूरी भी दे दी है. Also Read - 31 मई के बाद क्या चाहते हैं राज्य? गृह मंत्री अमित शाह ने पीएम मोदी को बताए मुख्यमंत्रियों के सुझाव

बता दें कि बीते दिनों राजस्थान सरकार ने कहा था कि चीन से मंगवाए गए टेस्टिंग किट के परिणाम सही नहीं आ रहे हैं. इस कारण राज्य में टेस्टिंग किट पर रोक लगा दी गई है. वहीं पश्चिम बंगाल सरकार ने किट पर सवाल खड़ा करते हुए इसे डिफेक्टिव बताया था. बता दें कि ICMR ने शिकायत मिलने के बाद रैपिड टेस्टिंग किट से कोरोना के जांच पर 2 दिनों की रोक लगाई है.