CoronaVirus In india: देश में कोरोना की दूसरी लहर की रफ्तार धीमी पड़ने के बाद अब इसकी तीसरी लहर आने की बातें सामने आ रही हैं और कहा जा रहा है कि बच्चों पर इसका ज्यादा असर देखा जा सकता है. लेकिन लांसेंट कोविड मिशन इंडिया टास्क फोर्स ने एक बड़ी राहत भरी खबर दी है. टास्क फोर्स ने अबतक के आंकड़ों की समीक्षा के बाद ये दावा किया है कि तीसरी लहर में संक्रमित बच्चों के अधिक गंभीर रूप से बीमार पड़ने के ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं. टास्क फोर्स ने अपने अध्ययन में दिल्ली-एनसीआर, तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र के दस अस्पतालों से लिए आंकड़ों को शामिल किया और फिर ये दावा किया है.Also Read - Coronavirus cases In India: कोरोना की तीसरी लहर की तरफ बढ़ रहा देश, 24 घंटे में 555 लोगों की हुई मौत

लांसेंट की तरफ से तीसरी लहर में बच्चों पर असर को लेकर एम्स के तीन बाल चिकित्सकों की सलाह से रिपोर्ट तैयार की गई है और  इसमें बताया गया कि अधिकतर बच्चों में संक्रमण के लक्षण नहीं दिखते. जिनमें लक्षण मिलते भी हैं तो वह हल्के या मध्यम होते हैं जिनका घर पर ही चिकित्सीय सलाह से इलाज हो जाता है. Also Read - दिल्ली में अब तक करीब 98 लाख कोरोना की खुराकें दी गईं, जानें क्या है वैक्सीनेशन की स्थिति

अध्ययन के बाद जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना की अबत तक की दो लहरों में महज 2600 बच्चों को ही अस्पताल ले जाना पड़ा है और इस दौरान जिन बच्चों मे मधुमेह, कैंसर, खून की कमी और कुपोषण जैसी पूर्व बीमारियां थीं उनकी हालत ही अधिक बिगड़ी. सामान्य रूप से स्वस्थ बच्चों में कोरोना से जान गंवाने का खतरा न के बराबर है. Also Read - CoronaVirus Kerala Alert: कोरोना वायरस ने केरल में एक बार फिर बनाया नया रिकॉर्ड, तीसरे लहर की चेतावनी तो नहीं...

बच्चों में ये लक्षण दिखे तो डॉक्टरों की सलाह लें…
रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस की वजह से अधिकतर बच्चों में बुखार, जुकाम या डायरिया के लक्षण जैसे पेट में दर्द, उलटी के लक्षण देखने को मिलेंगे. ऐसे मामलों में बिना घबराये डॉक्टरों की सलाह मानें तो बच्चे जल्द ही घर में ही स्वस्थ हो जाएंगे. इसमें भी 10 से कम उम्र वाले बच्चों में संक्रमण का खतरा अधिक उम्र वालों की तुलना में कम ही होगा.

दूसरी लहर के दौरान नहीं लग पाए डीटीपी, एमएमआर के टीके 
कई स्वास्थकर्मियों का मानना है कि कोरोना महामारी के दौरान अधिकतर माता-पिता अपने बच्चों को डीटीपी, न्यूमोकोकल, रोटावायरस और एमएमआर जैसी बीमारियों के खिलाफ जूरूरी नियमित टीकाकरण से चूक गए हैं. ज्यादातर लोग इस दौरान खुद को और बच्चों को कोरोना संक्रमण के डर से टीकाकरण केंद्रों में लाने से डर गए, जिससे ये जरूरी टीके बच्चों को नहीं लग पाए. बच्चों का टीकाकरण भी इससे प्रभावित हुआ है.