नई दिल्ली: देश में कोरोना वायरस महामारी के कारण बृहस्पतिवार से शुक्रवार तक 37 और लोगों की जान जाने के साथ ही, कोविड-19 से मरने वालों की संख्या बढ़कर 723 पहुंच गई. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक शुक्रवार को कोरोना वायरस संक्रमण के रिकॉर्ड 1,752 नए मामले सामने आए जिन्हें मिलाकर संक्रमित लोगों की कुल संख्या 23,452 पहुंच गई. इससे पहले 20 अप्रैल को एक दिन में सबसे ज्यादा 1,540 मामले सामने आए थे. इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण फैलने से पैदा हुई स्थिति अहमदाबाद, सूरत, हैदराबाद और चेन्नई सहित बड़े या उभरते हॉटस्पॉट इलाकों में खास तौर पर गंभीर है. सरकार ने इन शहरों में हालात की निगरानी करने के लिये अंतर-मंत्रालयी टीमें भी भेजी हैं. यह जानकारी मंत्रालय ने शुक्रवार को अपने डेली बुलेटिन में दी. Also Read - विश्‍व में सबसे ज्‍यादा coronavirus प्रभावित देशों की सूची में भारत 7वें स्‍थान पर

क्यों खास तौर पर गंभीर हैं ये शहर?
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा बेहद गंभीर स्थिति बताए जाने से पहले अहमदाबाद नगर निगम आयुक्त विजय नेहरा ने कहा कि यदि मामलों के दुगुनी होने की मौजूदा चार दिनों की अवधि वाली दर जारी रहती है, तो गुजरात के इस शहर में कोविड-19 के मरीजों की संख्या मई के अंत तक बढ़ कर आठ लाख हो सकती है. अब तक अहमदाबाद शहर में 1,638 मामले सामने आये हैं जो गुजरात में सर्वाधिक है. राज्य में संक्रमण के 2,600 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि देश के कुछ हिस्सों में लॉकडाउन दिशानिर्देशों का उल्लंघन पाया जाना लोगों के स्वास्थ्य के लिये एक गंभीर खतरा है और इसकी वजह से कोरोना वायरस संक्रमण फैल सकता है. उल्लेखनीय है कि ‘हॉटस्पॉट’ कोरोना वायरस से अत्यधिक प्रभावित क्षेत्र को कहा जा रहा है. Also Read - राजस्थान: अब कोरोना संक्रमित व्यक्ति के घर के आस-पास लगेगा कर्फ्यू, जानें क्या होंगे नियम

महाराष्ट्र का हाल खराब
महाराष्ट्र में शुक्रवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 394 नए मामले सामने आने के बाद राज्य में कुल मामलों की संख्या बढ़ कर 6,817 हो गई है. इस मामले में गुजरात दूसरे स्थान पर है. जबकि तमिलनाडु 1,755 मामलों के साथ छठे स्थान पर है. वहीं, तेलंगाना में 970 मामले सामने आ चुके हैं. इस बीच, कोविड-19 संकट से पैदा हुई स्थिति का आकलन करने के लिये कोलकाता का दौरा कर रही केंद्रीय टीम ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार को एक पत्र लिख कर कोरोना वायरस संक्रमण से होने वाली मौत के कारणों की जांच करने वाली समिति के कामकाज के बारे में एक विस्तृत ब्योरा मांगा. साथ ही, समिति के सदस्यों के साथ बातचीत करने की भी इजाजत देने की मांग की. Also Read - Delhi-Gurugram Border Opens: दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर खुला, जानें NCR के अन्य इलाकों का हाल

कहां-कहां भेजी गईं टीमें?
गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में ये टीमें अहमदाबाद, सूरत (गुजरात), हैदराबाद (तेलंगाना) और चेन्नई (तमिलनाडु) का दौरा करेंगी. उन्होंने कहा कि इससे पहले छह अंतर मंत्रालयी टीमों का गठन किया गया था और उन्हें महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में लॉकडाउन के कार्यान्वयन की समीक्षा के लिए भेजा गया. इनमें से दो टीमों को पश्चिम बंगाल भेजा गया. एक टीम कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना और पूर्व मेदिनीपुर गया तथा दूसरा दल जलपाईगुड़ी, दार्जीलिंग तथा कालिम्पोंग गया है.

ऐसे पैदा हुआ गंभीर खतरा
इन टीमों में सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारी शामिल हैं. राज्य सरकारें कोविड-19 महामारी के प्रबंधन के लिए इनकी विशेषज्ञता का लाभ उठा सकती हैं. दलों को आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 35 के तहत केंद्र सरकार को प्राप्त अधिकारों के तहत भेजा गया है. गृह मंत्रालय ने कहा कि देश के कुछ जिलों में लॉकडाउन दिशानिर्देशों के उल्लंघन के कई मामले सामने आये हैं, जिनसे स्वास्थ्य को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है और कोरोना वायरस संक्रमण फैलने का खतरा भी उत्पन्न हो रहा है. इस तरह, ये उल्लंघन आम लोगों के हितों के खिलाफ हैं. मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि यदि इस तरह की घटनाएं हॉटस्पॉट जिलों या उभरते हॉटस्पॉट स्थलों में या संक्रमण के अत्यधिक प्रसार संभावित इलाकों में बगैर किसी रोक-टोक के जारी रहने दी गई तो यह देश के लोगों के स्वास्थ्य के लिये एक गंभीर खतरा पैदा करेंगी.

क्या होगा इन टीमों का काम?
बयान में कहा गया है कि ये टीमें स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा, जांच किट, पीपीई (निजी सुरक्षा उपकरण) और अन्य सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा मजदूरों एवं गरीब लेागों के लिये राहत शिविरों की दशा आदि भी देखेंगी. वहीं, मध्य प्रदेश के इंदौर भेजी गई टीम ने रिपोर्ट दी कि शहर में 171 नियंत्रण क्षेत्र हैं जिनमें से 20 गंभीर हैं. मुंबई में धारावी, वडाला और गोवंदी का दौरा करने वाली टीम ने पाया कि धारावी के लोग घरों में ही पृथक-वास में हैं. टीम ने दो-तीन हजार लोगों के लिये संस्थागत पृथक-वास की व्यवस्था करने का सुझाव दिया. श्रीवास्तव ने बताया कि टीम ने धारावी में सचल शौचालय की व्यवस्था करने का सुझाव दिया है.

कितनों को मिली अस्पताल से छुट्टी?
मंत्रालय ने कहा देश में अभी 17,915 कोविड-19 मरीजों का इलाज चल रहा है जबकि 4,813 लोगों को ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई तथा एक व्यक्ति विदेश चला गया. मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि अत: अब तक करीब 20.52 प्रतिशत मरीज ठीक हो चुके हैं. भारतीय आयुर्विज्ञान शोध परिषद (आईसीएमआर) ने कहा कि 24 अप्रैल को सुबह नौ बजे तक 23,502 नमूने संक्रमित पाए गए थे. स्वास्थ्य मंत्रालय के 23,452 मरीजों के आंकड़े में 77 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं.

एक दिन में कितनों की मौतें?
मंत्रालय के आंकड़ों में कहा गया कि बृहस्पतिवार की शाम से कुल 37 लोगों की मौत इस बीमारी से हुई है. इनमें से 14 मरीजों की जान महाराष्ट्र में, नौ की गुजरात में, तीन की उत्तर प्रदेश में, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश,तमिलनाडु और तेलंगाना में दो-दो और कर्नाटक में एक मरीज की जान गई है. अब तक हुई कुल 723 मौत में से महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 283 लोगों की जान गई है. उसके बाद गुजरात में 112, मध्य प्रदेश में 83, दिल्ली में 50, आंध्र प्रदेश में 29, राजस्थान में 27 और तेलंगाना में 26 लोगों की मौत हुई है.

उत्तर प्रदेश में मरने वालों की संख्या 24 तक पहुंच गई है जबकि तमिलनाडु में 20 और कर्नाटक में 18 लोग इस बीमारी से जान गंवा चुके हैं. मंत्रालय के मुताबिक, पंजाब में 16 लोगों की मौत इस बीमारी से हुई है जबकि पश्चिम बंगाल में 15 जान गई हैं. कोविड-19 से जम्मू-कश्मीर में पांच, केरल, झारखंड और हरियाणा में तीन-तीन मौत हुई हैं. मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में दो लोगों की मौत हुई जबकि मेघालय, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और असम में एक-एक व्यक्ति की जान इस बीमारी से गई.

(इनपुट भाषा)