नई दिल्ली: देश में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है. इस बीच दिल्ली में रैपिड टेस्टिंग शुरु की जा चुकी है. इस टेस्टिंग में एक बात जो सामने आई वह बेहद चौंकाने वाली है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की मानें तो सोमवार के दिन कोरोना के जितने भी मामले सामने आएं, उन मामलों में से 80 प्रतिशत मामलों में कोरोना के लक्ष्ण नहीं दिखाई दिए या फिर बहुत कम पाए गए. ऐसे में कोरोना को ट्रैक कर पाना बेहद मुश्किल साबित हो जाता है. हालांकि पूरी दुनिया में इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन भारत में कोरोना के न दिखाई देने वाले लक्ष्णों व मामलों की संख्या थोड़ी ज्यादा है. Also Read - MP: महिला प्रोफेसर डॉक्‍टर पति की हत्‍या में अरेस्‍ट, खौफनाक ढंग से मर्डर को दिया था अंजाम

क्यों है बिना लक्ष्ण वाला कोरोना खतरनाक Also Read - Coronavirus: PM मोदी ने कोविड-19 स्थिति पर इन 4 राज्यों के मुख्यमंत्रियों से की बात

बिना लक्ष्ण वाले कोरोना को एसिम्पटोमैटिक कोरोना कहते हैं. विश्व में इसकी संख्या ज्यादा नहीं है लेकिन भारत में यह बाकी देशों की तुलना में थोड़ा ज्यादा है. बिना लक्ष्ण वाले कोरोना दो धारी तलवार की तरह है. अब जाहिर सी बात है कि जब क मरीज को बुखार खांसी या शरीर में दर्द की शिकायत नहीं होगी तो व इसके इलाज के लिए डॉक्टर के पास नहीं जाएगा. जब ऐसा होगा तो वह कोरोना टेस्टिंग से दूर ही रहेगा. साथ ही अपने शरीर के अंदर कोरोना को साथ लेकर घूमता फिरता रहेगा. ऐसे में संक्रमण के बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है. रिसर्च की मानें तो कोरोना मरीज लक्ष्ण दिखने से 2 दिन पहले से ही लोगों को संक्रमित कर सकते हैं. Also Read - Delhi में पब्लिक प्‍लेस में होने वाली शादियों पर बैन, सिर्फ शर्तों के साथ इजाजत, मेहमानों की संख्‍या सीमित

लक्ष्ण नहीं दिखने का कारण

डॉक्टरों व एक्सपर्ट्स की मानें तो इसका मुख्य कारण भारतीयों क इम्यून सिस्टम है. भारतीयों का इम्यून अन्य देशों के लोगों की तुलना में काफी बेहतर है. हमारे यहां लोग गर्म चीजों को खाना ज्यादा पसंद करते हैं. यही नही हमारे यहां गर्म चीजों को पीना भी काफी पसंद करते है. साथ ही यहां कि भौगोलिक स्थितियां भी इसके लिए जिम्मेदार है. यहां गर्मी भी ज्यादा पड़ती है. इस कारण कई संक्रमितों में कोरोना के लक्ष्ण नहीं दिखाई पड़ते है. एक्सपर्ट्स की मानें तो कोरोना काफी सेंसटिव वायरस है. इसपर गर्मी का काफी प्रभाव पड़ता है. हालांकि इसके सबसे ज्यादा शिकार युवा ही हो रहे हैं. क्योंकि जाहिर सी बात है क्योंकि युवाओं का इम्यून सिस्टम अन्य उम्र के लोगों की अपेक्षा काफी बेहतर होता है.