नई दिल्ली: भारत में कोरोना वायरस के मामलों में काफी तेजी देखने को मिल रही है. कोरोना संक्रमितों की संख्या लाखों में पहुंच चुकी है. ऐसे में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च द्वारा गठित रिसर्च ग्रुप की स्टडी में बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है. इस स्टडी के मुताबिक लाकडाउन के कारण कोरोना महमारी ने भारत में पीक नहीं पकड़ा. इस दौरान लगभग 70-97 फीसदी कोरोना के मामलों में कमी रही. लेकिन कोरोना अब जल्द ही अपनी पीक पर जा सकता है. लॉकडाउन हटने के बाद व ढील दिए जाने के बाद जिस तरह मामले सामने आ रहे हैं उसके मुताबिक नवंबर महीने में कोरोना अपने पीक पर होगा साथ ही इस दौरान देशभर में कोरोना मरीजे के लिए बेड्स और वेंटिलेटर्स की कमी हो सकती है. Also Read - विदेश सचिव बोले- भारत कूटनीतिक और सैन्य स्तर के माध्यमों से कर रहा है चीन के साथ बातचीत

स्टडी में बताया गया है कि अगर भारत में लॉकडाउन न लगाया गया होता तो आज कोरोना के मामले पीक पर होते. लेकिन लॉकडाउन के कारण लगभग 83 फीसदी कोरोना के मामलों में कमी देखने को मिली है. रिसर्च के मुताबिक अगर जन स्वास्थ्य उपायों को 80 फीसदी तक बढ़ाया जाता है तो कोरोना से होने वाली तबाही को कम किया जा सकता है. रिपोर्ट में बताया गया है कि लॉकडाउन के कारण कोरोना को पीक पर जाने से 34 से 76 दिन तक के लिए टाल दिया गया है. Also Read - डोभाल से बातचीत के बाद अब आया चीन का बयान, कहा- तनाव कम करने को लेकर ‘सहमति’ बनी

रिसर्च की मानें तो लॉकडाउन के कारण देश में और 60 फीसदी मौतों को टाल दिया गया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है लॉकडाउन के कारण जरूरी इंफ्रास्टक्चर बनाने का समय देश में मिल गया. बता दें कि देश में लगातार हर दिन 10 हजार से अधिक संक्रमितों के मामले सामने आ रहे हैं. इसी के साथ सरकार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. मंत्रालय के मुताबिक देश में 9 जून तक करीब 958 अस्पताल सिर्फ कोरोना के लिए काम कर रहे हैं. बता दें कि अकेले दिल्ली में जुलाई महीने में 5 लाख कोरोना संक्रमण के मामलों के सामने आने को लेकर दिल्ली सरकार की तरफ से चिंता जताई जा चुकी है. Also Read - ENG vs PAK: खिलाड़ियों के बल्‍ले पर ‘लोगो’ के लिए भी PCB नहीं जुटा पाया स्‍पांसर, उठने लगे सवाल