नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने मैट्रिक्स लैब द्वारा आयातित प्रत्येक रैपिड टेस्ट किट की अधिकतम कीमत 400 रुपये तय कर दी है, जिसमें जीएसटी भी शामिल है. मेडिकल किट की कीमत कम करते हुए न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने कहा, “लोगों को यह आश्वस्त करने के लिए कि महामारी नियंत्रण में है और सरकारों को इसकी कीमत सुनिश्चित करने के लिए और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए अग्रिम पंक्ति में लगी एजेंसियों के लिए, देश भर में सबसे कम लागत पर अधिक से अधिक किट/परीक्षण तत्काल उपलब्ध कराए जाने चाहिए.” Also Read - दिल्ली में 22000 के पार पहुंचे कोरोना वायरस के मामले, अब तक 556 की मौत

अदालत रेयर मेटाबॉलिक लाइफ साइंसेज द्वारा चीन से आयात की गई 7.24 लाख कोविड-19 रैपिड टेस्ट किट और अन्य कोविड-19 संबंधित सामग्री को जारी करने की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने रेटर मेटाबॉलिक को 27 और 28 मार्च को 600 रुपये में 5,00,000 परीक्षण किट के लिए कुल 30 करोड़ रुपये का ऑर्डर दिया था. रेयर मेटाबॉलिक ने मैट्रिक्स को यह जिम्मेदारी सौंप दी, जिसके पास चिकित्सा सामग्री आयात करने का लाइसेंस प्राप्त है. अदालत ने कहा कि मैट्रिक्स ने किट को 245 रुपये या कुल 12.25 करोड़ रुपये में आयात किया. इसने 21 करोड़ रुपये में रेयर मेटाबॉलिक को किट की आपूर्ति की. Also Read - अगस्त-सितंबर में टीम इंडिया का कैंप लगाने के बारे में सोच रही है बीसीसीआई

अदालत ने देखा कि रेयर मेटाबॉलिक ने बदले में 9 करोड़ रुपये का लाभ कमाया “जबकि इसमें आयातित चिकित्सा सामग्री के अलावा कोई खर्च नहीं हुआ है.” अदालत ने कहा कि इस 30 करोड़ रुपये का भुगतान आईसीएमआर द्वारा किया जाना है, जिसमें 18.7 करोड़ रुपये बिचौलिए का मार्जिन है. अदालत ने कहा, “देश सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाले एक अभूतपूर्व चिकित्सा संकट से गुजर रहा है. लोग 24 मार्च, 2020 को जहां भी रहे, वहीं बंद हो गए. अर्थव्यवस्था वास्तव में पिछले एक महीने से ठप है. ऐसे हालातों में सार्वजनिक हित को निजी लाभ से आगे रखना चाहिए.” हालांकि फर्मों ने आईसीएमआर को 2,76,000 किट वितरित किए हैं, लेकिन अदालत ने निर्देश दिया है कि जैसे ही बाकी की खेप भारत की भूमि पर पहुंचे वैसे ही शेष 2,24,000 किट भी डिलेवर कराई जाएं. Also Read - अमेरिका के बायोटेक कंपनी का दावा, कोरोना के मरीजों पर असरदार हो रहा है यह दवा