नई दिल्ली: कोरोना जैसी महामारी का खतरा एशिया की सबसे सुरक्षित और बड़ी मानी जाने वाली तिहाड़ जेल पर भी मंडराने लगा है. हालांकि तिहाड़ सहित दिल्ली की सभी तीनों जेल (रोहिणी-मंडोली) में कोरोना के मद्देनजर पहले से ही एहतियातन तमाम इंतजामात किए गए थे. लेकिन मौजूदा हालात में सारे इंतजाम अचानक ध्वस्त हों, उससे पहले ही प्रशासन आगे के इंतजाम में जुट गया है. अब इंतजार सिर्फ इस बात का है कि सुप्रीम कोर्ट जल्द से जल्द जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की रिहाई का कोई आदेश मुहैया करा दे. इसके बाद इन जेलों में ठूंस-ठूंसकर भरे गए कैदियों की भीड़ को कम कर दिया जाएगा. जेल प्रशासन चूंकि अदालत और कायदे कानून से जुड़ा है, लिहाजा जब तक देश का सर्वोच्च न्यायालय कोई रास्ता नहीं सुझाता, तब तक दिल्ली की जेलों में मौजूद कैदियों की भीड़ कतई कम नहीं हो सकती है. Also Read - कोरोना के खिलाफ जारी जंग में आज दिखेगी भारत की एकता, पीएम मोदी की अपील पर पूरा देश जलाएगा दीप

उल्लेखनीय है कि तिहाड़ की तीनों जेलों में कैदियों को बंद करके रख पाने की क्षमता केवल 10 हजार की है, जबकि तिहाड़, मंडोली, रोहिणी सहित दिल्ली की सभी तीन जेलों में कैदियों की मौजूदा अनुमानित संख्या करीब 17,500 है. दिल्ली जेल मुख्यालय के एक अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर सोमवार को आईएनएस को बताया, “इसमें संदेह नहीं कि हमारी तीनों ही जेलों में तादाद से ज्यादा कैदी हैं. इस तादाद को हाल फिलहाल कम करने का एक ही रास्ता है कि कुछ ऐसे मामलों में बंद कैदी, जो विचाराधीन हैं तथा उन पर गंभीर आरोप नहीं हैं, इन्हें कुछ वक्त के लिए रिहा कर दिया जाए. लेकिन यह सुप्रीम कोर्ट के किसी दिशानिर्देश से ही संभव होगा.” तिहाड़ जेल मुख्यालय सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में दिल्ली की जेलों में कैदियों की जो बहुतायत है, उसमें भी करीब साढ़े चौदह हजार के आसपास विचाराधीन हैं. कोरोना जैसी महामारी भीड़ और आपस में एक मीटर के अंदर के फासले पर इंसान के मिलने-बैठने से ही फैल रही है. जबकि तिहाड़ में एक मीटर के हिस्से में अनुमान के मुताबिक चार से पांच कैदी मजबूरी में रह रहे हैं. Also Read - सेलिब्रिटीज के COOKING VIDEO को देख भड़कीं सानिया मिर्जा, अभिनेत्री दिया मिर्जा ने किया ये कमेंट

उल्लेखनीय है कि कोरोना फैलने के दौरान तिहाड़ में करीब 18 संदिग्ध पाए गए थे. इनमें पांच बाहरी देशों के भी आठ विचाराधीन कैदी संदिग्ध मिले थे. इन सभी को तिहाड़ जेल में ही अलग बनाए गए आइसोलेशन रूम (बैरक) में रखा गया था. एक कैदी जो 18 मार्च, 2020 को ही गिरफ्तार होकर जेल पहुंचा था, उसे तो तत्काल कोरोना की आशंका के चलते दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में ले जाकर दाखिल कराना पड़ा. लेकिन उसमें कोरोना का कोई लक्ष्ण नहीं पाया गया. इसके बाद भी उसे तिहाड़ जेल में अस्पताल से वापस लाकर भी अलग ही रखा गया. आईएएनएस से इसकी पुष्टि दिल्ली जेल प्रवक्ता और अपर महानिरीक्षक (जेल) राज कुमार ने भी की. तिहाड़ जेल मुख्यालय के एक सूत्र ने सोमवार को आईएएनएस से कहा, “जिन विदेशी कैदियों को आइसोलेशन वार्ड में रखा गया, उनमें से 12 तो सिर्फ अफगानिस्तान के ही थे. हालांकि अब इनकी संख्या घटकर तीन रह गई है.” Also Read - अमेरिका में कोरोना से तीन लाख लोग संक्रमित, परेशान ट्रंप ने पीएम मोदी को फोन करके मांगी यह दवा

फिलहाल दिल्ली में जारी लॉकडाउन के बाद जेल में कैदियों को कोरोना से बचाने के क्या इंतजाम किए गए हैं? जेल प्रवक्ता राज कुमार ने कहा, “हर संभव उपाय कर लिए गए हैं.” जेल में कैदियों की भीड़ कम करने के उपायों पर उन्होंने कहा, “जैसी कोर्ट की गाइड-लाइंस होंगी, हम उन पर तुरंत अमल.” इसी तरह जेल से हासिल आंकड़ों के मुताबिक, “इस वक्त पांच अन्य देशों के आठ कैदी अभी भी आइसोलेशन वार्ड में ही दाखिल हैं. इनमें केंद्रीय कारागार संख्या-7 (तिहाड़) जेल में कुल चार विदेशी कैदी आइसोलेशन वार्ड में हैं. इन चार में से एक कैदी किर्गिस्तान और तीन कैदी अफगानिस्तान के हैं. जबकि सेंट्रल जेल नंबर 8-9 के आइसोलेशन वार्ड में रखे गए कुल तीन कैदियों में से दो कैदी जॉर्डन के और एक सऊदी अरब का है. इसी तरह केंद्रीय कारागार संख्या-10 (रोहिणी जेल) में एक ब्राजीली मूल के कैदी को आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है.”