रांची: देश और दुनिया इस समय कोरोना वायरस जैसे भयानक बीमारी से ग्रसित है. ऐस में इसे रोकने और इससे बचने के कई उपाय भी सामने आ रहे हैं. जहां एक तरफ देश के कई राज्य ने खुद को लॉकडाउन करने का एलान किया है वहीं दूसरी तरफ इतिहास में पहली बार सोमवार को झारखंड उच्च न्यायालय में भी मुख्य न्यायाधीश की खंड पीठ ने कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए टेरर फंडिंग के एक मामले की वीडियोकांफ्रेंसिंग से सुनवाई की. Also Read - Kashi Vishwanath Temple Guidelines: काशी विश्वनाथ और अन्नपूर्णा मंदिर में दर्शन के लिए नए नियम, कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य

सोमवार को आतंकी वित्त पोषण के एक मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डॉ. रवि रंजन एंव न्यायमूर्ति एस एन प्रसाद की खंडपीठ ने आरोपियों– विनीत अग्रवाल, महेश अग्रवाल एवं अमित उर्फ सोनू अग्रवाल की अंतरिम राहत बरकरार रखी. पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 अप्रैल की तिथि तय की है. Also Read - यूपी के CM योगी आदित्यनाथ कोरोना वायरस से संक्रमित, खुद Tweet कर दी जानकारी

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश के चैंबर में न्यायमूर्ति रंजन एवं न्यायमूर्ति प्रसाद की खंड पीठ बैठी. अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने वीडियो कांफ्रेंसिंग हॉल से ही इस मामले में बहस की. करीब आधे घंटे चली बहस के दौरान न्यायालय को बताया गया कि इन तीनों के खिलाफ एनआइए ने चार्जशीट दाखिल किया है, जिसमें कहा गया है कि इनकी ओर से टीपीसी को दिए गए लेवी का इस्तेमाल टेरर फंडिंग के लिए किया गया है. जबकि टीपीसी की ओर से इन लोगों से लेवी वसूली की गई है और इस तरह तीनों इस मामले में पीडि़त हैं लेकिन एनआइए ने इन्हें आरोपी बना दिया है. Also Read - ...जब ट्रैफिक पुलिस का ही कट गया 2,000 रुपये का चालान, जानें पूरा मामला

इस पर न्यायालय ने इन तीनों की अंतरिम राहत को बरकरार रखते हुए 20 अप्रैल तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी. विनीत अग्रवाल, महेश अग्रवाल और अमित अग्रवाल ने याचिका दाखिल कर एनआइए द्वारा उनके खिलाफ बनाये गये मामले को निरस्त करने की मांग की है.