नई दिल्ली: सरकार ने फैसला लिया है कि अगर किसी सरकारी कर्मचारी को भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित कर दिया गया है या फिर उसके खिलाफ मुकदमे को मंजूरी दे दी गई है, वह पासपोर्ट नहीं हासिल कर पाएगा. कार्मिक मंत्रालय ने केंद्रीय सर्तकता आयोग और विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर इस संबंध में लागू मौजूदा दिशानिर्देशों की समीक्षा करने के बाद इस आशय का आदेश जारी किया है. Also Read - CoronaVirus In India: देश में Oxygen की किल्लत, अब विदेश से मेडिकल ऑक्सीजन मंगाएगी मोदी सरकार

पासपोर्ट उस स्थिति में भी रोका जा सकता है यदि आवेदक को हाजिर होने के लिए सम्मन या उसकी गिरफ्तारी के लिए किसी अदालत से वारंट जारी किया गया है. Also Read - महाराष्ट्र सरकार के विपरीत शरद पवार ने दिया बयान, कहा- मुश्किल घड़ी में केंद्र सरकार कर रही सहयोग

कार्मिक मंत्रालय की ओर से सभी सरकारी विभागों के सचिवों को भेजे गए आदेश में कहा गया है कि ऐसे सरकारी बाबुओं को पासपोर्ट की मंजूरी के लिए सर्तकता अनापत्ति की जांच करना जरूरी है. Also Read - ममता बनर्जी ने विपक्ष के बड़े नेताओं को लिखा खत, केंद्र सरकार के खिलाफ की ये मांग

आदेश के अनुसार यह तय किया गया है कि यदि अधिकारी निलंबित है या फिर किसी आपराधिक मामले में उसके खिलाफ जांच एजेंसी ने अदालत में आरोपपत्र दायर कर दिया है, ऐसी स्थिति में सतर्कता अनापत्ति रोकी जा सकती है.

आदेश के मुताबिक सरकारी बाबुओं की पासपोर्ट प्राप्त करने के वास्ते सतर्कता अनापत्ति तब भी रोकी जा सकती है यदि सक्षम प्राधिकार ने भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम या किसी अन्य आपराधिक मामले में मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी हो या अदालत ने मामले का संज्ञान ले लिया हो.

सभी विभागों से यह पता करने को कहा गया है कि क्या उनके यहां काम कर रहे सरकारी बाबुओं को भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के मामले में पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 6 (2) का प्रावधान इससे जुड़ा है या नहीं.

यह धारा संबंधित प्रशासन को आवेदक को पासपोर्ट देने से मना करती है यदि भारत से बाहर उसकी मौजूदगी दूसरे देश के साथ भारत के दोस्ताना रिश्ते पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है या केंद्र सरकार मानती है कि आवेदक को यात्रा दस्तावेज देना जनहित में नहीं होगा.