नई दिल्ली। बहुप्रतीक्षित वस्तु एवं सेवा कर लागू होने पर तंबाकू उत्पाद, पान मसाला, शीतल पेय और लग्जरी गाडि़यों पर अतिरिक्त टैक्स लगेगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की बैठक में इस पर सहमति बन गयी है। माना जा रहा है कि तंबाकू उत्पादों पर लगने वाले टैक्स की दर 37 प्रतिशत तक हो सकती है। जीएसटी काउंसिल ने गुरुवार चार स्तरीय जीएसटी दर का फैसला किया. ये दरें होगीं 5, 12, 18, 28 फीसदी।Also Read - Kangana Ranaut Padma Shri Award: पद्मश्री से नवाजी गईं कंगना रनौत, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दी बधाई, बजने लगी तालियां

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असल में तंबाकू उत्पादों पर फिलहाल औसतन 65 प्रतिशत टैक्स है। वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि तंबाकू उत्पादों पर मौजूदा टैक्स और जीएसटी की अधिकतम दर (28 प्रतिशत) के अंतर के बराबर सैस लगेगा। ऐसे में माना जा रहा है कि टैक्स की दर 37 प्रतिशत के आस पास हो सकती है। जेटली ने ऐलान किया कि आम आदमी के द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे खाद्यान्न पर कोई टैक्स नहीं होगा। यह भी पढ़े-जीएसटी: चार स्तरीय कर दरें, 5 से 28 प्रतिशत तक लगेगा टैक्स Also Read - Arun Jaitley Death Anniversary: अरुण जेटली की पुण्यतिथि पर भावुक हुए PM मोदी, कहा- 'मुझे अपने दोस्त की बहुत याद आती है'

ये होंगी GST दरें।

जिन वस्तुओं पर इस समय उत्पाद शुल्क और वैट सहित कुल 30-31 प्रतिशत कर लगता है उन पर जीएसटी दर 28 प्रतिशत होगी। आम लोगों की सामान्य उपभोग की वस्तुओं पर जीएसटी की दर 5 प्रतिशत होगी। जीएसटी में 12 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो मानक दरें होंगी. जेटली ने कहा, जीएसटी के तहत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में शामिल खाद्यान्न सहित आम व्यक्तियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली 50 प्रतिशत वस्तुओं पर शून्य कर लगेगा।

हालांकि इस संबंध में आधिकारिक तौर पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। वैसे इस बात का निर्णय हो चुका है कि तंबाकू उत्पादों पर जीएसटी की उच्चतम दर 28 प्रतिशत ही लागू होगी। अब तक कुछ राज्य तंबाकू उत्पादों पर सैस लगाने के बजाय इसे जीएसटी की 40 प्रतिशत दर में रखने की वकालत कर रहे थे। हालांकि जीएसटी काउंसिल को यह सुझाव रास नहीं आया। यह भी पढ़े-जीएसटी परिषद के गठन को मंत्रिमंडल की मंजूरी

गौरतलब है कि मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविन्द सुब्रमण्यम की अध्यक्षता वाली समिति ने भी तंबाकू उत्पादों को 40 प्रतिशत की श्रेणी में रखने की सिफारिश की थी। वित्त मंत्री का कहना है कि सैस के माध्यम से जुटाई जाने वाली राशि का इस्तेमाल सरकार राज्यों को राजस्व हानि की भरपाई के लिए करेगी। यह सैस शुरु में पांच साल के लिए लगाया जाएगा लेकिन जीएसटी काउंसिल समय-समय पर इसकी समीक्षा करेगी। वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें।

उल्लेखनीय है कि तंबाकू उत्पादों से फिलहाल भी केंद्र और राज्यों को बड़ी राजस्व प्राप्ति होती है। वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी इसका इस्तेमाल नियंत्रित करने के लिए अधिक टैक्स रखने की वकालत करते हैं।