नई दिल्ली: देश में बोफोर्स तोप खरीदी में रिश्वत मामले का आग अभी तक ठंडी नहीं हुई. दिल्ली की एक अदालत ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील बोफोर्स रिश्वतकांड में आगे और जांच करने की अनुमति मांगने वाली सीबीआई की याचिका पर चार दिसंबर को सुनवाई करने का फैसला किया है. आरोप है कि इस मामले में कथित रूप से 64 करोड़ रुपए की रिश्वत दी गई थी. Also Read - Roshni Land Scam Latest News: CBI ने J&K के पूर्व मंत्री कांग्रेस नेता के खिलाफ केस दर्ज

यह मामला मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट आशु गर्ग के सामने रखा गया और न्यायाधीश ने अधिवक्ता अजय अग्रवाल की इस दलील पर संज्ञान लेने के बाद सुनवाई स्थगित कर दी कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में सुनवाई के बाद मूल दस्तावेज अदालत में वापस आएंगे. शीर्ष अदालत अक्तूबर के दूसरे सप्ताह में सुनवाई कर सकती है. Also Read - राजीव गांधी हत्याकांड: सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- दोषी की सजा माफी पर राज्यपाल को फैसला करना है

साल 2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ रायबरेली से चुनाव लड़ने वाले अग्रवाल ने शीर्ष अदालत में अपील उस समय दायर की थी, जब सीबीआई 90 दिन की अनिवार्य समय सीमा में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने में नाकाम रही थी. Also Read - हाथरस मामला: पॉलीग्राफ, ब्रेन मैपिंग टेस्ट के लिए चार आरोपियों को गुजरात लेकर गई सीबीआई की टीम

सीबीआई ने एक फरवरी को निचली अदालत में याचिका दायर करके इस मामले में और जांच के लिए अनुमति मांगी थी और कहा था कि उसे ताजा सामग्री और साक्ष्य मिले हैं.

अदालत को बताया गया कि इस मामले से जुड़े मूल दस्तावेज शीर्ष अदालत के पास हैं. अदालत ने इससे पहले दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर मामले की सुनवाई स्थगित की थी. ये दस्तावेज शीर्ष अदालत के पास मौजूद हैं.

शीर्ष अदालत में अग्रवाल की वह याचिका विचाराधीन है जिसमें आरोपियों के खिलाफ सभी आरोप निरस्त करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के 31 मई 2005 के फैसले को चुनौती दी गई है.