नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को यह आदेश देते हुए कि वह महज आधारकार्ड स्कैन नहीं होने के कारण परीक्षा से वंचित किये गए एमबीबीएस प्रवेशार्थी को 50000 रुपये हर्जाना भरे, घटना की पुनरावृति रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किये हैं. न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह की अदालत ने कहा कि एम्स के परीक्षा नियंत्रक ने अनावश्यक रूप से विद्यार्थी को परीक्षा में शामिल होने से रोक कर बेहद क्रूर रुख अपनाया. प्रवेश परीक्षा केंद्र से किसी विद्यार्थी को लौटा देना, अपूरणीय नुकसान है और इससे हर हाल में बचा जाना चाहिए.

हालांकि अदालत ने यह कहते हुए फिर से परीक्षा का आयोजन करने का आदेश नहीं दिया कि इससे अन्य विद्यार्थियों को बहुत परेशानी होगी जो पहले ही परीक्षा दे चुके हैं. ऐसे विद्यार्थियों पर एक और परीक्षा का बोझ डालना अनुचित होगा. कर्नाटक के एक विद्यार्थी ने अवकाश के दौरान उच्च न्यायालय में अर्जी लगाई थी. उसे 26 मई को एम्स प्रवेश परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया था क्योंकि कलबुर्गी में परीक्षा केंद्र पर मोबाइल फोन ऐप के जरिए आधार कार्ड के क्यूआर कोर्ड का सत्यापन कर रहे कर्मचारी उसकी आधार संख्या का सत्यापन नहीं कर पाए थे.

2 हजार आधार कार्ड मिले
दूसरी ओर जयपुर के जालूपुरा थाना क्षेत्र में गुरुवार को कबाड़ी की एक दुकान से लगभग 2000 आधार कार्ड मिले.पुलिस ने बताया कि किसी व्यक्ति ने कबाड़ी को पुराने अखबार बेचे थे और अखबारों के ढेर में एक बोरे में लगभग 2000 आधार कार्ड पाए गए हैं. थानाधिकारी लिखमाराम ने बताया कि बोरा आधार कार्ड पोस्ट के जरिये बांटने वाला पार्सल प्रतीत होता है. आधार कार्ड को स्थानीय क्षेत्र में वितरित किया जाना था, लेकिन इसकी जांच की जा रही है कि आधारकार्ड का बोरा सामान्य पोस्ट ऑफिस कार्यालय से कबाड़ी के पास कैसे पहुंचा.