Ajmer Khwaja Garib Nawaz : उत्तर प्रदेश के संभल में जामा मस्जिद सर्वे को लेकर हुई हालिया हिंसा के बीच अब राजस्थान के अजमेर शरीफ दरगाह में सर्वे के लेकर बड़ी खबर सामने आई है. दरगाह को शिव मंदिर बताने वाली याचिका कोर्ट ने स्वीकार कर ली है, जिसे लेकर काफी दिनों से सर्वे की मांग चल रही थी. सिविल कोर्ट (वेस्ट) के जज मनमोहन चंदेल ने याचिका स्वीकार करते हुए मामले को सुनवाई के लायक माना है. याचिका में दरगाह का ASI सर्वे कराए जाने की मांग की गई है, जिससे ये पता लगाया जा सके कि क्या दरगाह वाली जगह पहले क्या शिव मंदिर था या नहीं? जज मनमोहन चंदेल ने कहा कि इस मामले में अजमेर दरगाह कमेटी, अल्पसंख्यक विभाग और एएसआई को नोटिस जारी किए जाएंगे.
किसने दायर की याचिका?
अजमेर ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह की जगह संकट मोचन शिव मंदिर होने का दावा करते हुए हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने अजमेर सिविल कोर्ट वेस्ट में याचिका दायर की थी. वकील रामनिवास बिश्नोई और ईश्वर सिंह ने बुधवार को इस याचिका के पक्ष में कोर्ट के सामने दलील पेश की. गौरतलब है कि हिंदू सेना ने दावा किया है कि वर्तमान दरगाह स्थल पहले एक शिव मंदिर था. हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने 1910 में प्रकाशित हर विलास शरदा की पुस्तक और अन्य दस्तावेजों का हवाला देते हुए यह दावा किया है. उन्होंने मंदिर के ऐतिहासिक अस्तित्व को प्रमाणित करने के लिए साक्ष्य पेश किए और दरगाह का सर्वेक्षण कराने की मांग की है.
भगवान शिव के बाल स्वरूप की दलील
भगवान शिव के बाल स्वरूप की ओर से वकीलों ने कोर्ट में दलील दी कि दरगाह से पहले यहां शिव मंदिर था. इसके समर्थन में दस्तावेज और ऐतिहासिक साक्ष्य प्रस्तुत किए गए. वकीलों ने अदालत से अनुरोध किया कि इस स्थल को हिंदू समाज को पूजा के लिए लौटाया जाए. यह तर्क दिया गया कि ऐतिहासिक रूप से यह स्थल संकट मोचन मंदिर के रूप में जाना जाता था.
अगली सुनवाई की तारीख
इस मामले की सुनवाई 27 नवंबर को निर्धारित की गई है. वकीलों ने कोर्ट से आग्रह किया कि इस स्थल की पूरी जांच और सर्वेक्षण किया जाए ताकि ऐतिहासिक तथ्यों को सामने लाया जा सके. यह विवाद धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है, जिस पर अदालत के फैसले का इंतजार है.
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