नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार, काला धन और बेनामी लेनदेन पर लगाम लगाने के लिए नागरिकों की चल और अचल संपत्ति के दस्तावेजों को आधार से जोड़ने का अनुरोध करने वाली एक याचिका पर मंगलवार को केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब तलब किया. याचिका में दावा किया गया है कि उच्च मूल्य की मुद्रा में ‘बेनामी’ लेनदेन का उपयोग अवैध गतिविधियों में किया जाता है जैसे आतंकवाद, नक्सलवाद, अलगाववाद, जुआ, धन शोधन और रिश्वतखोरी.

बता दें कि पहले यह याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी, जिसने मामले पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था और याचिकाकर्ता को चुनाव आयोग जाने को कहा था.

दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ ने याचिका पर केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया और मामले को अगली सुनवाई के लिए 15 अक्टूबर को सूचीबद्ध कर दिया.

याचिकाकर्ता वकील और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि राज्य का यह फर्ज है कि वह भ्रष्टाचार को रोकने और अवैध साधनों के जरिए बनाई गई बेनामी संपत्ति को जब्त करके सख्त संदेश दे कि सरकार भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ लड़ने को दृढ़ है.

फर्जी और डुप्लीकेट मतदाता पहचान पत्रों को रोकने के लिए उन्हें आधार संख्या से जोड़ने के लिए दायर की गई एक अन्य याचिका पर उपाध्याय द्वारा मार्च में दिए गए अभिवेदन पर चुनाव आयोग को आठ हफ्तों में फैसले का करने का निर्देश दिया.

अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया है जिसमें उन्होंने आधार आधारित चुनाव मतदान प्रणाली लागू करने के लिए चुनाव आयोग को उचित कदम उठाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था, ताकि चुनाव में अधिकतम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो तथा फर्जी मतों को रोका जा सके.

संपत्ति के दस्तावेजों को आधार से जोड़ने वाली याचिका में याचिकाकर्ता ने वरिष्ठ वकील विकास सिंह के जरिए कहा कि अगर सरकार संपत्ति को आधार से जोड़ती है, तो इससे वार्षिक संवृद्धि में दो प्रतिशत की बढ़त होगी. यह चुनाव प्रक्रिया को स्वच्छ करेगा जिसमें काला धन और बेनामी लेनदेन का बोलबाला है तथा काले धन के निवेश पर फलता-फूलता है.