नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने कथित रूप से नफरत फैलाने वाला भाषण देने के मामले में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विभिन्न नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध करने वाली याचिका पर शुक्रवार को केंद्र, दिल्ली सरकार और पुलिस से जवाब मांगा. Also Read - Delhi School closed: मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का बड़ा फैसला, दिल्ली में सभी स्कूल अगले आदेश तक बंद

मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ ने याचिका पर केंद्रीय गृह मंत्रालय, दिल्ली सरकार और पुलिस को नोटिस जारी किये. याचिका में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, आप के विधायक अमानतुल्ला खान, एआईएमआईएम नेता अकबरुद्दीन ओवैसी और एआईएमआईएम के पूर्व विधायक वारिस पठान के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज किए जाने की मांग की गई है. Also Read - दिल्ली में हाईकोर्ट, जिला अदालतों में 23 अप्रैल तक डिजिटल सुनवाई

यह याचिका ‘लॉयर्स वॉइस’ ने दायर की है. याचिका में कथित रूप से नफरत फैलाने वाले भाषणों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल गठित किए जाने की भी मांग की गई है. अदालत ने तीन भिन्न याचिकाओं पर भी केंद्र, दिल्ली सरकार और पुलिस को नोटिस जारी किए. ये याचिकाएं संजीव केकुमार, विष्णु गुप्ता और भीम आर्मी प्रमुख चंद्र शेखर आजाद ने दायर की है. आजाद ने इस सप्ताह पेश याचिका में हस्तक्षेप करने की इजाजत देने का अनुरोध किया. उक्त याचिका में कथित नफरत फैलाने वाला भाषण देने वाले भाजपा के तीन नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है. Also Read - चुनावी रैलियों में मास्क जरूरी क्यों नहीं? कोरोना गाइडलाइंस की अनदेखी पर हाईकोर्ट नाराज, केंद्र और EC से मांगा जवाब

केकुमार की याचिका में आप नेता अमानतुल्ला खान, अभिनेत्री स्वरा भास्कर और रेडियो जॉकी सायमा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है. उन्होंने हर्ष मंदर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की भी मांग की है. मंदर ने भाजपा नेताओं अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा और कपिल मिश्रा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की मांग करते हुए याचिका दायर की है. केकुमार ने अदालत से अनुरोध किया है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी को उत्तरपूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की जांच करने का आदेश दिया जाए.

हिंदू सेना के विष्णु गुप्ता ने एक अर्जी में एआईएमआईएम नेताओं पठान, असदुद्दीन ओवैसी और अकबरुद्दीन ओवैसी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध करते हुए आरोप लगाया कि नफरत फैलाने वाले उनके भाषणों के कारण दिल्ली में साम्प्रदायिक तनाव बढ़ा. आजाद ने अपने आवेदन में मिश्रा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की और आरोप लगाया कि भाजपा नेता उत्तरपूर्वी दिल्ली में हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं.

इसमें उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हिंसा में घायल लोगों की शिकायतों पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. गौरतलब है कि उत्तरपूर्वी दिल्ली में 23 फरवरी को हिंसा शुरू हो गई थी. आजाद ने अदालत से अनुरोध किया कि वह पुलिस को हिंसा में घायल लोगों की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दे. दिल्ली हिंसा में अब तक 42 लोगों की मौत हो चुकी है और 250 से अधिक लोग घायल हैं. इन आवेदनों को सुनवाई के लिए 13 अप्रैल को सूचीबद्ध किया गया है.

(इनपुट भाषा)