ई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने रेलिगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड (आरएफएल) के धन की कथित हेराफेरी के आरोप में गिरफ्तार फोर्टिस के पूर्व प्रवर्तकों मालविंदर सिंह और उनके भाई शिविंदर सिंह को गुरुवार को14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट निशांत गर्ग ने तीन अन्य आरोपियों-सुनील गोधवानी, कवि अरोड़ा और अनिल सक्सेना- को भी 31 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया. इस मामले में सिंह बंधु ने जमानत याचिका दायर की थी जिस पर शुक्रवार को अरोड़ा की याचिका के साथ इसकी सुनवाई होगी.

गौरतलब है कि साल 2016 में इस घोटाले को अंजाम दिया गया था. रेलिगेयर के एक सीनियर मैनेजर की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी. शिकायत में बताया गया कि कंपनी और उसकी सहयोगी कंपनी रेलिगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड के साथ धोखाधड़ी की गई और हजारों करोड़ों रुपए संपत्ति की गलत तरीके से ट्रांजैक्शन के जरिए हेराफेरी की गई. इसमें बताया गया कि सिंह बंधुओं ने साल 2016 में दूसरे आरोपियों के साथ मिलकर इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया था. आरोप यह बी लगाया गया कि दोनों भाइयों ने सोच समझ कर इस घोटाले की साजिश रची और बड़ा वित्तीय घपला किया.

साल 2018 सितंबर महीने में सिंह भाइयों में कलह शुरू हुई थी. छोटे भाई शिविंदर ने अपने बड़े भाई मलविंदर और रेलीगेयर के पूर्व चीफ सुनील गोधवानी पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया. मलविंदर ने कहा था कि उन्होंने खुद को अपने बड़े भाई के साथ किसी भी पार्टनरशिप से अलग कर लिया है. खातों में धांधली को लेकर फोर्टिस हेल्थकेयर की ओर से स्वतंत्र जांच का निर्णय लिए जाने के बीच छोटे भाई ने यह कदम उठाया था.

इस मामले में जांच खुलासे के बाद बाजार नियामक सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ने दोनों भाइयों और उनसे संबंधित 8 फर्म्स को 403 करोड़ रुपये फोर्टिस के खाते में जमा करने का आदेश दिया है. जांच में पता चला था कि दोनों ने फोर्टिस से फंड को अन्य जगह पर डाइवर्ट किया और फाइनेंशियल स्टेटमेंट में गड़बड़ियां की.

(इनपुट-भाषा)