नयी दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री एम जे अकबर द्वारा दायर मानहानि के मामले में पत्रकार प्रिया रमानी को एक आरोपी के तौर पर तलब किया है. ‘मी टू’ अभियान के दौरान रमानी ने अकबर पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे. अदालत ने देखा कि अकबर के खिलाफ लगाए गए आरोपों की प्रकृति “प्रथम दृष्टया मानहानिकारक’’ है और उन्होंने सभी आरोपों को ‘‘गलत एवं काल्पनिक’’ बताते हुए इनसे इनकार किया है. इसके बाद अदालत ने रमानी को 25 फरवरी को अपने समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया.

अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल ने कहा, “प्रतिवादी के आरोप प्रथम दृष्टया अपमानजनक हैं और शिकायतकर्ता की ओर इशारा करते हैं, इसलिए वह व्यथित व्यक्ति हैं…यह शिकायत दर्ज कराने के लिहाज से. उन्होंने प्रतिवादी द्वारा अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को गलत एवं मनगढ़ंत बताया है.” उन्होंने 23 पन्नों के आदेश में कहा, “ये मानहानिकारक बयान प्रकाशित हुए हैं, व्यापक स्तर पर पढ़े गए हैं और खासकर गवाहों द्वारा जिन्होंने गवाही दी है कि उनके हिसाब से शिकायतकर्ता की साख गिरी है.” अदालत ने कहा, “फिलहाल अदालत के पास केवल शिकायतकर्ता का बयान है जिन्होंने अदालत में शपथ लेते हुए कहा कि सभी आरोप गलत हैं और बाद में अपने निर्दोष एवं बेदाग साख को प्रमाणित करने के लिए गवाह लेकर आए.” रमानी ने आरोप लगाया था कि अकबर ने तकरीबन 20 साल पहले उनका यौन उत्पीड़न किया था. इन आरोपों का अकबर ने खंडन किया था.

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अदालत का आदेश आने के बाद रमानी ने ट्विटर पर लिखा कि मामले में अपना पक्ष रखने का समय आ गया. अदालत ने कहा कि अकबर द्वारा लाए गए गवाहों ने भी साबित किया है कि उनके अनुमान से शिकायतकर्ता की साख गिरी है. अकबर से जुड़े तीन प्रत्यक्षदर्शियों – तपन चाकी, मंजर अली और रचना ग्रोवर ने अदालत के समक्ष गवाही दी कि वे बहुत अधिक “निराश एवं व्यथित” हैं क्योंकि आरोपों के चलते उनकी साख को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा है. अदालत ने मामले में संडे गार्डियन की संपादक जोयिता बसु और अकबर के भी बयान दर्ज किए थे. अदालत ने पाया कि आरोपी को तलब करने के निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए अकबर और उनकी तरफ से पेश हुए गवाहों से पूछताछ कर जांच सही तरीके से की गई. उसने कहा, “प्रतिवादी प्रिया रमानी द्वारा शिकायतकर्ता की मानहानि करने का अपराध हुआ, प्रथम दृष्टया यह मानने के लिए सभी जरूरी बातें रिकॉर्ड में मौजूद हैं और इसलिए उनके खिलाफ कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त आधार हैं.”

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अदालत ने कहा, “इसी के अनुसार प्रिया रमानी को भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत मानहानि का अपराध करने के लिए 25 फरवरी, 2019 को अदालत के समक्ष पेश होने के लिए तलब किया जा रहा है.” अकबर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गीता लूथरा एवं अधिवक्ता संदीप कपूर ने अदालत को बताया कि लेख में लगाए गए आरोप एवं बाद में किए ट्वीट मानहानिकारक हैं. सोशल मीडिया पर नाम उछलने के बाद अकबर ने पिछले साल 17 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था. मीटू अभियान के दौरान कई महिलाएं अकबर के पत्रकार रहते हुए यौन उत्पीड़न किए जाने के वाकयों के साथ सामने आई थीं.