नई दिल्ली: कोरोना वायरस के खतरे से निपटने के लिए देश के अधिकांश शहरों में लॉकडाउन के बीच केंद्र सरकार ने निजी और सार्वजनिक कंपनियों के कर्मचारियों की सुधि ली है. केंद्र सरकार ने इन क्षेत्रों की कंपनियों से कहा है वे इस संकट की घड़ी में कर्मचारियों की न ही छंटनी करें और न ही उनका वेतन काटें. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिव हीरालाल समरिया ने इस बाबत सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले ही बिजनेस समुदाय और उच्च आय वर्ग के लोगों से भी इस तरह की अपील कर चुके हैं. Also Read - Corona Vaccination: अब 18 वर्ष से अधिक की आयु वालों को भी लगेगी वैक्सीन, कितना होगा खर्चा, कैसे लगवाएं टीका?

लेबर सेक्रेटरी हीरालाल सामरिया ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को जारी पत्र में कहा है कि कोरोना वायरस से पैदा संकट के बीच कर्मचारियों की सहूलियतों का ध्यान रखना जरूरी है. सभी पब्लिक और प्राइवेट कंपनियों को सुझाव दिया जाता है कि वे इस दौरान किसी भी कर्मचारी की छंटनी नहीं करेंगे और न ही उनका पैसा काटेंगे. अगर कोई कर्मचारी छुट्टी लेता है तो भी वह ड्यूटी पर माना जाएगा. नियमित और संविदा दोनों तरह के स्टाफ की सेवा सुरक्षा का ख्याल रखा जाए. Also Read - VIDEO | कोरोना से बचाव के लिए हाथों को कितनी बार धोना है जरूरी? एक्सपर्ट से जानें यहां...

लेबर सेक्रेटरी ने कहा है कि इस विपरीत परिस्थिति में अगर किसी कर्मचारी को टर्मिनेट किया जाता है तो इससे स्थिति और खराब होगी. किसी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई इस महामारी से लड़ने में उसकी इच्छाशक्ति को कम करेगा. लेबर सेक्रेटरी ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों से अपने राज्य में स्थित निजी और सार्वजनिक कंपनियों को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करने को कहा है. Also Read - Summer Vacation Begins in Delhi Schools: दिल्ली के स्कूलों में अब इस दिन से गर्मी की छुट्टियां

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने भी सभी नियोक्ताओं से अनुरोध किया है कि वे अपने ऐसे किसी कर्मचारी का वेतन न काटें जो बीमारी या सोशल डिस्टेंसिंग के कारण कार्य करने में असमर्थ हैं.