नई दिल्ली: कोरोना वायरस के कारण देशव्यापी लॉकडाउन के चलते बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों के अपने गृहनगरों एवं गांवों की ओर पैदल ही लौटने की घटनाओं का संज्ञान लेते हुए उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र सरकार से इसकी रिपोर्ट मांगी थी. जिसके बाद आज अपनी रिपोर्ट में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह 23 लाख लोगों को खाना दे रहे हैं. Also Read - दिल्ली में कोरोना के मामले 25 हजार के पार, 161 और मरीजों की मौत; 29.74 प्रतिशत हुई संक्रमण की दर

केंद्र ने मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि वह लगभग 23 लाख लोगों को भोजन मुहैया करा रहा है. शीर्ष अदालत एक दायर याचिका दायर पर सुनवाई कर रही थी जिसमें हजारों प्रवासियों को राहत देने का अनुरोध किया गया था जो लॉकडाउन के चलते बिना काम के रह गए हैं और घर पहुंचने के लिए बेताब हैं. Also Read - VIDEO | क्या हवा के माध्यम से भी आपके शरीर में प्रवेश कर सकता है कोरोना वायरस?

आज, सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि लॉकडाउन के कारण अंतरराज्यीय प्रवास पर पूर्ण प्रतिबंध था. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि आज (मंगलवार) सुबह 11 बजे, सड़कों पर कोई प्रवासी कामगार नहीं हैं. Also Read - कोरोना महामारी के बीच Honda की इन कारों पर मिल रहा है Big Discount, नकद छूट से साथ और भी कई लाभ

उन्होंने कहा, “22 लाख, 88 हजार से अधिक लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. ये जरूरतमंद व्यक्ति, प्रवासी और दैनिक ग्रामीण हैं. उन्हें आश्रय में रखा गया है.”

बता दें कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि ‘‘भय एवं दहशत’’ कोरोना वायरस से बड़ी समस्या बनती जा रही है. शीर्ष न्यायालय ने इन लोगों के पलायन को रोकने के लिए उठाये जा रहे कदमों के बारे में केंद्र से मंगलवार यानी आज तक रिपोर्ट देने को कहा था.

केंद्र की ओर से यह टिप्पणी करते हुए तुषार मेहता ने कहा कि ‘फेक न्यूज’ इसकी सबसे बड़ी चुनौती है. उन्होंने कहा कि सरकार घबराहट को दूर करने के लिए परामर्श प्रदान करने पर भी विचार कर रही है.

इस बीच, केंद्र सरकार ने सोमवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश जारी किया कि जिलाधिकारी कोविड-19 के मद्देनजर की गई बंद की घोषणा के बाद अपने-अपने घरों को जाने का इंतजार कर रहे प्रवासी कर्मियों के भोजन एवं आश्रय का प्रबंध करने को अपनी निजी जिम्मेदारी बनाएं.

बता दें कि बंद लागू किए जाने के कारण पिछले पांच दिनों में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर बड़े शहरों से अपने गृहनगर या गांव जाने के लिए पैदल ही निकल पड़े जिससे कोरोना वायरस को फैलने का खतरा बढ़ गया. इस वायरस से विश्वभर में 34,500 से अधिक लोगों की जान ले ली है और 7.27 लाख से अधिक लोग इससे संक्रमित हैं.

(इनपुट ऐजेंसी)