नई दिल्ली: कांग्रेस ने कोरोना संकट के मद्देनजर सांसदों के वेतन में 30 फीसदी की कटौती के निर्णय का सोमवार को स्वागत किया,हालांकि सांसद निधि को दो साल के लिए निलंबित किये जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे संसदीय क्षेत्रों में विकास कार्यों को नुकसान होगा और ऐसे में इसे बहाल किया जाना चाहिए. लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया कि सरकार का यह फैसला देश के आपातकाल की तरफ बढ़ने का प्रमाण है. उन्होंने कहा कि सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए. Also Read - बॉलीवुड फिल्म निर्माता अनिल सूरी का कोरोना वायरस के कारण 77 साल की उम्र में निधन

चौधरी ने ट्वीट किया, ‘सांसद निधि को निलंबित करना जनप्रतिनिधियों और मतदाताओं के प्रति घोर अन्याय है क्योंकि आम मतदाता की मांग पर सांसदों को अपनी निधि विकास कार्य में खर्च करने की स्वायत्तता होती है.” उन्होंने दावा किया, ‘ सरकार के निर्णय से साबित होता है कि देश वित्तीय आपातकाल की तरफ बढ़ रहा है.’ पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक बयान में कहा, ‘प्रधानमंत्री जी, कांग्रेस सांसदों के वेतन में कटौती का समर्थन करती है. 30 नहीं 40 या 50 फीसदी कटौती कर सकते हैं. ‘ उन्होंने कहा, ‘ सांसद निधि संसदीय क्षेत्रो में विकास कार्यों के लिए बनी है. सांसद निधि को निलंबित करना संसदीय क्षेत्रों के लिए बड़ी हानि है और इससे सांसद की भूमिका एवं कामकाज प्रभावित होगा.’ सुरजेवाला ने कहा कि सांसद निधि को बहाल करना चाहिए और भारत सरकार के खर्च में कटौती करनी चाहिए. Also Read - Coronavirus Jharkhand Update: एक दिन 95 नए मामले, संक्रमितों की संख्या हुई 922, रांची में एक और मौत

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि सांसद निधि को बहाल किए जाना चाहिए क्योंकि यह राशि क्षेत्र के विकास कार्यों पर खर्च होती है. दूसरी तरफ, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं जयराम रमेश और राजीव गौड़ा ने पार्टी से अलग रुख जाहिर करते हुए सांसद निधि को दो साल के लिए निलंबित किए जाने के फैसले का स्वागत किया है. हर संसद सदस्य को सांसद निधि के रूप में हर साल पांच करोड़ रुपये की राशि मिलती है जो वह अपने क्षेत्र के विकास कार्यों में खर्च कर सकता है. Also Read - Coronavirus: देश में कोविड-19 के कुल मामले हुए 2 लाख 28 हजार, इन राज्यों में एक महीने में दस गुना से अधिक नए मामले

केंद्र सरकार ने कोरोना महामारी के मद्देनजर सोमवार को फैसला किया कि प्रधानमंत्री, मंत्रियों और सांसदों के वेतन में एक साल के लिए 30 फीसदी की कटौती होगी तथा सांसद निधि को दो साल के लिए निलंबित किया जाएगा. सरकार के मुताबिक इसकी पेशकश प्रधानमंत्री, मंत्रियों और सांसदों ने कोरोना संकट के मद्देनजर खुद की थी जिसके बाद कैबिनेट ने इस निर्णय पर मुहर लगाई.