नई दिल्ली: कोरोनो वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए 21 दिनों के लॉकडाउन के मद्देनजर बेघर हुए प्रवासी श्रमिकों की गंभीर स्थिति को देखते हुए गृह मंत्रालय (MHA) ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे एसडीआरएफ फंड आवंटन के तहत ‘बेघर लोगों के लिए अस्थायी आवास, भोजन, कपड़े, चिकित्सा देखभाल आदि के प्रावधान शामिल करें. इनमें प्रवासी मजदूर भी शामिल हैं जो लॉकडाउन के कारण फंसे हुए हैं और राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं.’ के तहत. Also Read - सरकार ने होईकोर्ट को बताया, 'महाराष्ट्र में 13 हजार से अधिक कैदियों का कोविड-19 टीकाकरण किया गया'

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य आपदा राहत कोष (एसडीआरएफ) के तहत दी जाने वाली सहायता के नियमों में शनिवार को बदलाव किया जिसके तहत 21 दिन के लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों के लिए भोजन और ठहरने की अस्थायी व्यवस्था के लिए इस कोष से पैसा दिया जाएगा. Also Read - Coronavirus Delta Variant: डेल्टा स्वरूप के हावी होने की आशंका, 85 देशों में सामने आए मामले

मंत्रालय ने सभी मुख्य सचिवों को भेजे पत्र में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से घोषित बंद के दौरान प्रवासी मजदूरों को चिकित्सा सेवा एवं कपड़े भी उपलब्ध कराए जा सकते हैं. Also Read - COVID19 Cases: डेल्‍टा की आशंका के बीच देश में कोरोना के 54,069 नए केस, 1321 मौतों, एक्‍ट‍िव मरीज 6.27 लाख

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक एसडीआरएफ के नये नियमों के तहत अस्थायी आवास, भोजन, कपड़े, चिकित्सीय देखभाल आदि का प्रावधान बंद के चलते फंसे प्रवासी मजदूर समेत बेघर लोगों तथा राहत शिविरों या अन्य स्थानों पर रह रहे लोगों पर लागू होगा.

ऐसी खबरें सामने आई हैं कि देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपना कार्य स्थल छोड़ कर सैकड़ों किलोमीटर पैदल चल कर अपने पैृतक स्थानों पर लौट रहे हैं और रास्ते में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं.

राष्ट्रव्यापी बंद की घोषणा के बाद सामान्य यातायात सेवाएं बंद हो जाने के कारण प्रवासी मजदूरों के पास पैदल चलकर घर पहुंचने का ही विकल्प बचा है.