नई दिल्ली: भारत और इजराइल द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की जा रही और एक मिनट से भी कम समय में नतीजे देने वाली कोविड-19 की त्वरित जांच टेक्‍नोलॉजी का आना बस कुछ ही दिनों की बात रह गई है. कोरोना वायरस संक्रमण का पता लगाने के लिये इस त्वरित जांच प्रौद्योगिकी के तहत किसी व्यक्ति को एक ट्यूब में बस फूंक मारनी होगी और 30-40-50 सेकेंड में इसके नतीजे आ जाएंगे. Also Read - Top News Of The Day: काबू में आया कोरोना! 24 घंटे में केवल 47 हजार नए मामले और 587 की मौत

इस खास किट के बारे में भारत में इजराइल के राजदूत ने यह जानकारी दी है. इजराइली राजदूत रॉन मल्का ने यह भी कहा कि इजराइल चाहता है कि भारत इस त्वरित जांच किट के लिए विनिर्माण केंद्र बने और दोनों देश कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिए टीका विकसित करने पर भी सहयोग करेंगे. साथ ही विनिर्माण में भारत के मजबूत भूमिका में होने से, वह इसके उत्पादन में काफी मायने रखता है. Also Read - Corona Patients Garba Video: COVID-19 केंद्रों में मरीजों ने किया 'गरबा', सोशल मीडिया पर VIDEO वायरल

इजराइली राजदूत ने कहा कि कोविड-19 की त्वरित जांच परियोजना अपने अंतिम चरण में है. मल्का ने न्‍यूज एजेंसी पीटीआई/ भाषा को दिए एक इंटरव्‍यू में कहा, ”मुझे लगता है कि यह बस कुछ ही दिनों की बात रह गई है. इस प्रक्रिया में शामिल लोगों से मैं जो कुछ सुन रहा है, उसके अनुसार एक विश्वसनीय एवं सटीक प्रौद्योगिकी को या विश्लेषण की जा रही चार विभिन्न प्रौद्योगिकी में से एक से अधिक के संयोजन को अंतिम रूप देने में दो-तीन हफ्ते से अधिक वक्त नहीं लगना चाहिए. ” Also Read - WAR के गाने पर डॉक्टर ने पीपीई किट पहने किया जबरदस्त डांस, ऋतिक बोले- ये स्टेप्स तो...

भारतीय और इजराइली अनुसंधानकर्ताओं ने चार विभिन्न प्रकार की प्रौद्योगिकी के लिए भारत में बड़ी संख्या में नमूने एकत्र करने के बाद परीक्षण किए हैं, इनमें सांस की जांच करना और आवाज की जांच करना भी शामिल है, जिसमें कोविड-19 का त्वरित पता लगाने की क्षमता है.

‘आइसोथर्मल’ जांच भी है, जिसके जरिए लार के नमूने में कोरोना वायरस की मौजूदगी की पहचान की जा सकती है और ‘पोली-अमीनो एसिड’ का उपयोग करते हुए भी एक जांच है, जो कोविड-19 से संबद्ध प्रोटीन को अलग-थलग करती है.

मल्का ने बताया कि उनसे वैज्ञानिकों ने कहा है कि इन चार प्रौद्योगिकी का चयन करने के लिए दर्जनों प्रौद्योगिकी की जांच की गई, जो अंतिम चरण में पहुंचने के लिये अब अलग-अलग मांगों के मुताबिक विभिन्न स्तरों से गुजरी हैं. उन्होंने कहा, ”मैं आशावादी हूं कि सभी शुरूआती परिस्थितियां गुजर चुकी हैं.”

राजदूत ने कहा कि यह नयी त्वरित जांच निर्णायक साबित होने वाली है और इस बारे में एक शानदार उदाहरण है कि भारत और इजराइल के बीच विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग कितना सार्थक हो सकता है.

इजराइली राजदूत ने कहा, ‘‘यह पूरी दुनिया के लिये अच्छी खबर होगी…इस संयुक्त अभियान को हमने ‘खुला आसमान’ नाम दिया है, जो सचमुच में अंतरराष्ट्रीय यात्रा और आर्थिक गतिविधियों के संदर्भ में आसमान खोल देगी क्योंकि इसका (त्वरित जांच प्रौद्योगिकी) इस्तेमाल हवाईअड्डों और अन्य स्थानों पर किया जा सकेगा, जिसके तहत किसी व्यक्ति को एक ट्यूब में बस फूंक मारनी होगी और इसके नतीजे 30-40-50 सेकेंड में उपलब्ध हो जाएंगे. ’’

मल्का ने कहा कि इसके अलावा यह लागत के लिहाज से भी बहुत सस्ती होगी क्योंकि इसमें जांच के स्थान पर पर ही नतीजे आ जाएंगे और किसी नमूने को प्रयोगशाला भेजने की जरूरत भी नहीं होगी.

टीके के विकास पर सहयोग के बारे में पूछे जाने पर मल्का ने कहा कि दोनों देश अनुसंधान और प्रौद्योगिकी साझा कर रहे हैं. मल्का ने कहा, ”हमें लगता है कि जब एक विश्वसनीय टीका आ जाएगा जो सुरक्षित एवं कारगर होगा तो इसका ज्यादातर उत्पादन भारत में होगा.”

मल्का ने कहा कि महामारी के कारण स्वास्थ्य का विषय दोनों देशों के बीच सहयोग का एक फौरी वरीयता वाला क्षेत्र बन गया है. उन्होंने यह भी कहा कि वह आयुष्मान भारत के सीईओ इंदु भूषण के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि मिशन में सहयोग के तरीके तलाशे जाएं.

त्वरित जांच प्रौद्योगिकी, इजराइली रक्षा मंत्रालय के रक्षा अनुसंधान एवं विकास निदेशालय और भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) तथा भारत के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के सहयोग से संयुक्त रूप से विकसित की जा रही है. इसका समन्वय दोनों देशों का विदेश मंत्रालय कर रहा है.

इजराइली राजदूत ने महामारी फैलने के बाद भारत में फंसे अपने हजारों नागरिकों को स्वदेश भेजने में की गई मदद को लेकर भारतीय अधिकारियों का शुक्रिया अदा किया.