Pregnant Women Vaccination Update: मां के दूध पर कोविड के खिलाफ टीकों से कोई असर नहीं पड़ता है. एक छोटे से अध्ययन के अनुसार यह गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए टीके की सुरक्षा का संकेत देता है और शुरूआती सबूत प्रदान करता है कि शॉट शिशु को हस्तांतरित नहीं होते हैं. कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय-सैन फ्रांसिस्को (यूसीएसएफ) के शोधकर्ताओं ने एमआरएनए-फाइजर और मॉडर्न, टीके प्राप्त करने के बाद सात महिलाओं के ब्रेस्ट मिल्क का विश्लेषण किया. उन टीकों का कोई निशान नहीं मिला जो एसएआरएस-सीओवी 2 के संचरण को रोकने के लिए जाने जाते हैं, ये एक ऐसा वायरस है जो कोविड का कारण बनता है.Also Read - नए स्ट्रेन का खतरा: द. अफ्रीका, चीन, बांग्लादेश समेत इन 7 देशों से भारत आने वालों का एयरपोर्ट पर RT-PCR टेस्ट जरूरी

जामा बाल रोग में विस्तृत अध्ययन, स्तनपान के दौरान टीका सुरक्षा का पहला प्रत्यक्ष डेटा प्रदान करता है और उन लोगों के बीच चिंताओं को दूर कर सकता है जिन्होंने टीकाकरण से इनकार कर दिया है या इस चिंता के कारण स्तनपान बंद कर दिया है कि टीकाकरण मानव दूध को बदल सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन अनुशंसा करता है कि स्तनपान कराने वाले लोगों को टीका लगाया जाए, और स्तनपान चिकित्सा अकादमी ने कहा है कि टीका नैनोकणों या एमआरएनए स्तन ऊतक में प्रवेश करने या दूध में स्थानांतरित होने का थोड़ा जोखिम है, जो सैद्धांतिक रूप से शिशु प्रतिरक्षा को प्रभावित कर सकता है. Also Read - सरकार ने फिर चेताया- नहीं खत्म हुई कोरोना की दूसरी लहर, बताया- तीसरी लहर की आशंका के बीच कैसे मनाएं त्योहार; एडवाइजरी जारी

यूसीएसएफ में मातृ-भ्रूण चिकित्सा के सहायक प्रोफेसर स्टेफनी एल गॉ ने कहा, ‘परिणाम वर्तमान सिफारिशों को मजबूत करते हैं कि एमआरएनए टीके स्तनपान में सुरक्षित हैं, और जो स्तनपान कराने वाले महिला को कोविड वैक्सीन प्राप्त करना चाहिए, उन्हें स्तनपान बंद नहीं करना चाहिए.’ यूसीएसएफ के पोस्टडॉक्टरल फेलो लीड लेखक यार्डन गोलन ने कहा, ‘हमे परीक्षण किए गए दूध के किसी भी नमूने में एमआरएनए से जुड़े टीके का पता नहीं लगा. ये निष्कर्ष स्तनपान के दौरान एमआरएनए-आधारित टीकों के उपयोग की सुरक्षा के संबंध में प्रयोगात्मक साक्ष्य प्रदान करते हैं.’ Also Read - भोजन के लिए भीख मांगने निकली थी गर्भवती महिला, एंबुलेंस ड्राइवर ने किया रेप, फिर दोस्त को भी बुलाया

अध्ययन दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 तक आयोजित किया गया था. माताओं की औसत आयु 37.8 वर्ष थी और उनके बच्चों की आयु एक महीने से तीन वर्ष तक थी. टीकाकरण से पहले और टीकाकरण के 48 घंटे बाद तक कई बार दूध के नमूने लिए गए. शोधकर्ताओं ने पाया कि किसी भी नमूने में दूध के किसी भी घटक में वैक्सीन एमआरएनए का पता लगाने योग्य स्तर नहीं दिखा. हालांकि, लेखकों ने नोट किया कि अध्ययन छोटे नमूने के आकार से सीमित था और कहा कि स्तनपान के परिणामों पर टीकों के प्रभाव का बेहतर अनुमान लगाने के लिए बड़ी आबादी से क्लिनिकल डेटा की आवश्यकता थी. (IANS Hindi)