Omicron Scare: कोरोना के Omicron वेरिएंट का खतरा पूरी दुनिया पर मंडरा रहा है. दक्षिण अफ्रीका (South Africa) से निकला कोरोना (Coronavirus) का यह नया वेरिएंट अब तक दुनियाभर के कई देशों में लोगों को संक्रमित कर चुका है. भारत में भी लगभग दो दर्जन लोग Omicron से संक्रमित पाए गए हैं. Omicron के 21 मामले सामने आने के बाद देश में इस वेरिएंट को लेकर खौफ बना हुआ है. हर कोई यह जानना चाहता है कि उन्होंने कोविड-19 वैक्सीन (Covid Vaccine) ली है वह इस वायरस के खिलाफ उन्हें सुरक्षा देगी या नहीं. प्रश्न बूस्टर डोज (Booster Dose) को लेकर भी हैं. कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को अतिरिक्त वैक्सीन और बच्चों को कोरोना के खिलाफ वैक्सीन (Corona Vaccine) लगाने सहित ऐसे ही कई प्रश्नों का उत्तर आज मिल जाएगा. इस पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (NTAGI) की सोमवार को मीटिंग होने जा रही है. कमजोर प्रतिरक्षा (Immunosuppressant) वाले व्यक्तियों को कोविड-19 की अतिरिक्त खुराक दी जाए या नहीं इस मुद्दे पर इसी बैठक में विचार किया जाना है. अधिकारियों के अनुसार यह अतिरिक्त खुराक Booster Dose से अलग होती है.Also Read - Haryana में कोरोना पाबंदियों में ढील, 50 फीसदी क्षमता के साथ खुलेंगे सिनेमाघर-मल्टीप्लेक्स; स्कूलों को लेकर यह हुआ फैसला

अधिकारियों ने अतिरिक्त खुराक और बूस्टर डोज के बीच के अंतर को समझाते हुए कहा, ऐसे किसी व्यक्ति को एक पूर्वनिर्धारित अवधि के बाद बूस्टर खुराक दी जाती है, जब यह माना जाता है कि प्राथमिक टीकाकरण की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में कमी आ गई है, जबकि अतिरिक्त खुराक कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों को दी जाती है जब प्राथमिक टीकाकरण संक्रमण और रोग से पर्याप्त सुरक्षा प्रदान नहीं करता है. ज्ञात हो कि हाल ही में, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने औषधि नियामक से कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ बूस्टर डोज के रूप में कोविशील्ड के लिए मंजूरी मांगी थी. Also Read - दक्षिण अफ्रीकी चमगादड़ों में मिला कोरोना का 'NeoCov' वेरिएंट क्या इंसानों के लिए है घातक? WHO की तरफ से आई यह जानकारी

सीरम इंस्टीट्यूट में सरकार और नियामक मामलों के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह ने भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) को एक अर्जी में कहा था कि ब्रिटेन के औषधि एवं स्वास्थ्य देखभाल उत्पाद नियामक एजेंसी ने पहले ही एस्ट्राजेनेका CHADOX1 NCOV-19 टीके के बूस्टर खुराक को मंजूरी दे दी है. उन्होंने साथ ही यह भी उल्लेख किया कि भारत में कोविशील्ड की कोई कमी नहीं है और नए वेरिएंटों के सामने आने के मद्देनजर बूस्टर डोज की मांग उन लोगों के लिए है, जो पहले से ही दो खुराक ले चुके हैं. Also Read - UP School News: योगी सरकार का आदेश- यूपी में स्कूल और सभी शिक्षण संस्थान 6 फरवरी तक रहेंगे बंद

29 नवंबर के अपने बुलेटिन में, भारतीय Sars-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम’ (INSACOG) ने 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए कोविड-19 टीकों की बूस्टर खुराक की सिफारिश की थी, जिसमें उन लोगों को पहली प्राथमिकता दी जाए, जिनके संक्रमित होने का खतरा सबसे अधिक है. हालांकि, शनिवार को इसने कहा कि इसकी सिफारिश राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के लिए नहीं थी, क्योंकि इसके प्रभाव के आकलन के लिए कई और वैज्ञानिक प्रयोगों की आवश्यकता है. और पढ़ें – Omicron Symptoms: कोरोना के इस नए वेरिएंट ओमीक्रोन के लक्षण भी जान लें और सतर्क रहें

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने बूस्टर डोज के संबंध में हाल ही में लोकसभा को सूचित किया था कि टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (NTAGI) और कोविड-19 टीकाकरण पर राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह (NEGVAC) इस पहलू से संबंधित वैज्ञानिक प्रमाणों पर विचार कर रहे हैं.

कमजोर प्रतिरक्षा वाली श्रेणी में कैंसर का इलाज कराने वाले रोगी, प्रत्यारोपण करा चुके रोगी, एड्स रोगी आदि आते हैं और उनकी प्रतिरक्षा में सुधार के लिए टीके की अतिरिक्त खुराक (तीसरी खुराक) की आवश्यकता होती है. विशेषज्ञों ने कहा कि ओमीक्रोन जैसे नए वेरिएंटों के उभरने के बावजूद, टीकाकरण बीमारी और संक्रमण से सुरक्षा के सबसे मजबूत तरीकों में से एक है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि हालांकि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि मौजूदा टीके सार्स-सीओवी-2 के ओमीक्रोन स्वरूप पर काम नहीं करते हैं. हालांकि, सामने आए कुछ म्यूटेशन टीके की प्रभावशीलता को कम कर सकते हैं.

(इनपुट – पीटीआई)