Covishield Vaccine Update: सरकार ने शुक्रवार को कहा कि कोविशील्ड टीके की दो खुराक के बीच अंतराल में तत्काल बदलाव के मामले में हड़बड़ी की जरूरत नहीं है. समयावधि बढ़ाने के लिए भारतीय परिप्रेक्ष्य में उचित वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत होगी. कोविशील्ड (Covishield) की दो खुराकों के बीच अंतर को थोड़ा कम करने की वकालत करने वाले कुछ अध्ययनों की खबरों के संदर्भ में नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉक्टर वीके पॉल (VK Paul) ने कहा कि इस तरह की चिंताओं पर संतुलित रुख की जरूरत है. Also Read - सोनिया गांधी-राहुल गांधी ने कोरोना का टीका लगवाया है या नहीं? कांग्रेस ने दिया भाजपा के सवाल का जवाब

कोविड-19 पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे पॉल ने कहा, ‘खुराकों के बीच अंतराल तत्काल बदलने की जरूरत की बात करने में हड़बड़ी की आवश्यकता नहीं है. इस तरह के फैसले बहुत सावधानी से लिये जाने चाहिए. हमें याद रखना चाहिए कि जब हमने अंतराल बढ़ाया तो हमें उन लोगों को वायरस से होने वाले जोखिम पर विचार करना पड़ा, जिन्होंने केवल एक खुराक ली थी. हालांकि उसका भी जवाब था कि कई और लोगों को पहली खुराक मिल जाएगी और इस तरह अधिक लोगों की एक सीमा तक प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा जाएगी.’ Also Read - स्वास्थ्य मंत्री का राहुल गांधी पर तंज- 'कांग्रेस के युवराज के ज्ञान के सामने आर्यभट्ट-अरस्तु भी नतमस्तक'; जानें पूरा मामला...

उन्होंने कहा कि टीकाकरण पर तकनीकी परामर्श देने वाले समूह में ऐसे लोग भी हैं जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की एवं अन्य समितियों में रहे हैं और जिनकी प्रतिष्ठा वैश्विक स्तर पर है. ‘इसलिए कृपया उनके फैसलों का सम्मान करें.’ उधर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि देश में कोविड-19 के प्रसार का आकलन करने के लिए ICMR चौथे चरण का राष्ट्रीय सीरो सर्वेक्षण करेगा. वीके पॉल ने कहा कि रोजाना सामने आने वाले मामलों और एक्टिव मरीजों की संख्या में हो रही कमी से लगता है कि देश में कोविड की स्थिति स्थिर हो रही है. संक्रमण दर अब कम होकर करीब पांच फीसदी रह गई है. हालांकि, उन्होंने लोगों से कोविड-19 अनुकूल व्यवहार और सामाजिक दूरी के नियम का अनुपालन करते रहने का आह्वान किया. Also Read - Covishield के दो डोज के बीच गैप बढ़ाने पर एक्सपर्ट ने उठाया सवाल तो सरकार ने दी सफाई

पॉल ने कहा, ‘ICMR इस महीने से अगले चरण का सीरो सर्वेक्षण करेगा, जिससे कोविड-19 के प्रसार का आकलन करने में मदद मिलेगी. लेकिन हम अपने भौगोलिक क्षेत्रों को बचाना चाहते हैं तो हमें अकेले एक ‘राष्ट्रीय सीरो सर्वेक्षण’ पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को भी अपने स्तर पर सीरो सर्वेक्षण करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा.’ भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के मुताबिक, 21 राज्यों के 70 जिलों में सीरो सर्वेक्षण किया जाएगा और इसमें 6 साल से अधिक उम्र के बच्चों को भी शामिल किया जाएगा.

(इनपुट: भाषा)