नई दिल्ली: लाल किला के मैदान में दिल्ली के प्रसिद्ध लवकुश रामलीला में इस बार मंगलवार को रावण दहन में आतिशबाजी का इस्तेमाल नहीं होगा. आयोजकों ने वायु प्रदूषण कम करने के लिए आतिशबाजी की परंपरा खत्म करने का कदम उठाया है. वैसे पटाखे छूटने की आवाज स्पीकर से निकाली जाएगी. लवकुश रामलीला के एक आयोजक अर्जुन कुमार ने सोमवार को कहा, ‘‘ हम प्रदूषण के खिलाफ संदेश देना चाहते हैं. रावण का दहन तो होगा लेकिन पटाखों की आवाज स्पीकर के माध्यम से सुनायी जाएगी.’’ उन्होंने कहा कि रावण, उनके बेटे मेघनाथ और भाई कुंभकरण के पुतलों की ऊंचाई भी 125 फुट से घटाकर 60 फुट कर दी गई है.

पिछले साल यहां के ऐतिहासिक लवकुश रामलीला में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शिरकत की थी. पीएम मोदी ने लाल किला मैदान में तीर चलाकर रावण का पुतला दहन किया था. इस मौके पर केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन के अलावा दि‍ल्‍ली बीजेपी के अध्‍यक्ष मनोज ति‍वारी भी मौजूद थे. रामलीला मैदान में पहुंचने पर पीएम मोदी और राष्‍ट्रपत‍ि ने राम सहि‍त दूसरे कि‍रदार नि‍भाने वाले कलाकारों से मुलाकात भी की थी.

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राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा था की हमे प्रभु राम के जीवन से प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ना है. भगवान राम ने रावण पर जनसमूह और पर्यावरण से मदद लेकर वि‍जय प्राप्‍त की थी. राष्ट्रपति ने देशवासियों को दशहरा की शुभकामानाएं देते हुए कहा था, हम रावण के रूप में अपने अंदर और आसपास की सभी बुराइयों का नाश करें. हम बिना किसी को कष्ट पहुंचाए अपने त्योहार को मनाएं.