जम्मू. जम्मू-कश्मीर की अपराध शाखा बचाव पक्ष के वकील के खिलाफ स्थानीय अदालत जाएगी. अधिकारियों ने बताया कि वकील आठ वर्षीय बच्ची से गैंगरेप के बाद हत्या मामले से जुड़े तथ्यों को कथित तौर पर तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है. इस तरह माहौल को खराब करने का प्रयास कर रहा है. अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने उस सीडी का संज्ञान लिया है जिसमें एक प्रत्यक्षदर्शी को यह कहते सुना जा सकता है कि अपराध शाखा ने बच्ची से रेप के एक आरोपी विशाल शर्मा के खिलाफ बयान देने का उस पर दबाव बनाया.

शर्मा इस मामले के मुख्य साजिशकर्ता शांजी राम का बेटा है. इस मामले के कारण देशभर में आक्रोश है. अधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल हुई सीडी वकील ने उपलब्ध करवाई थी और इसे मेजिस्ट्रेट के समक्ष गवाह के बयान के तौर पर पेश किया था. हालांकि शुरुआती जांच में पता चला कि वकील ने इसे अदालत परिसर के बाहर तैयार किया ताकि जनता को भ्रमित किया जा सके और सरकार के खिलाफ असंतोष पैदा किया जा सके. एक अधिकारी ने कहा, ‘‘ यह निश्चित ही मामले के गवाह को धमकाने के प्रयास का मामला है और इस मामले से जुड़ी संवदेनशीलता को ध्यान में रखते हुए हमें तुरंत दखल देने की जरूरत है. ’’

जांचकर्ताओं के मुताबिक अल्पसंख्यक घुमंतू समुदाय की बच्ची को कथित तौर पर शांजी राम के कहने पर ही अगवा किया गया था क्योंकि वह गुज्जर और बकरवाल समुदाय के लोगों को वहां से भगाना चाहता था. यह समुदाय सर्दियों में यहां से 90 किमी दूर गांव में चला जाता है. बच्ची को कथित तौर पर कठुआ जिले के एक छोटे से गांव के मंदिर में एक हफ्ते तक बंधक बनाकर रखा गया. घटना इस वर्ष जनवरी माह की है. उसे नशे में रखा जाता था , हत्या से पहले उसका यौन उत्पीड़न किया गया था.

सरकार ने 23 जनवरी को मामला अपराध शाखा को सौंप दिया था, जिसने विशेष जांच दल का गठन किया. इसमें आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया. इसमें मामले में राम के साथ विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया और सुरेंद्र वर्मा, एक अन्य व्यक्ति परवेश कुमार उर्फ मन्नू, राम का बेटा और उसका एक नाबालिग रिश्तेदार भी शामिल थे. आरोप पत्र में जांच अधिकारी हेड कॉन्स्टेबल तिलक राज और उप निरीक्षक आनंद दत्ता का भी नाम है जिन्होंने राम से कथित तौर पर चार लाख रुपये लिए और अहम साक्ष्यों को नष्ट किया.