बीजेपी जो उत्तर प्रदेश को गुंडाराज और भ्रष्टाचार से मुक्त कराकर उत्तम प्रदेश बनाना चाहती है, उसने ही इस बार सूबे की कमान एक ऐसे व्यक्ति के हाथ में सौंप दी है जिसका विवादों से पुराना नाता रहा है। हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री अजय सिंह बिष्ट यानि योगी आदित्यनाथ की। जिनके खिलाफ अदालत में कई गंभीर अपराधिक मामले लंबित हैं। 2014 के लोकसभा चुनावों में दाखिल हलफनामे में उन्होंने स्वयं अपने ऊपर लगे सभी मामलों के बारे में जानकारी दी है। अपनी कट्टर हिंदूवादी छवि के लिए पहचाने जाने वाले योगी जी पर लगे अपराध इतने गंभीर हैं कि उनकी कुर्सी तो जाएगी ही, हो सकता है उन्हें मौत की सजा भी हो जाए।

2007 में गोरखपुर में मुहर्रम के दौरान एक हिंदू युवक की मौत के बाद आदित्यनाथ और उनके समर्थकों ने मुस्लिम समुदाय पर खुलेआम गोलीबारी कर दी थी। इसके क्षेत्र में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई। इन दंगों के बीच बिना प्रशासन की अनुमति के योगी ने शहर में श्रद्धान्जलि सभा आयोजित की और कानून का उल्लंघन किया था। इसके बाद उन्हें और उनके कई समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया गया। वह भारतीय दंड संहिता की धारा 151 ए, धारा 146, 147, 279, 506 के तहत जेल में भी रहे थे। यह भी पढ़ें: डोभाल से लेकर योगी तक, देश के शीर्ष पदों पर पौड़ी के लोगों का दबदबा

उनके खिलाफ दर्ज कुछ अन्य आपराधिक मामले:

  • दंगों से संबंधित तीन आरोप (आईपीसी सेक्शन -147)
  • हत्या के लिए प्रयास से संबंधित एक आरोप (आईपीसी सेक्शन -307)
  • अन्य की व्यक्तिगत सुरक्षा या जीवन को खतरे में डालने से संबंधित एक आरोप (आईपीसी सेक्शन -336)
  • कब्रिस्तानों पर अतिक्रमण (आईपीसी सेक्शन -297)
  • आपराधिक धमकी से संबंधित एक आरोप (आईपीसी धारा -506)
  • हत्या से संबंधित एक आरोप जिसके लिए (आईपीसी सेक्शन -302) के तहत मौत या उम्र कैद की सजा का प्रावधान है।

इन मामलों में कई पर क्लोजर रिपोर्ट फाइल की जा चुकी है लेकिन फैसला आना बाकि है। ऐसे में योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल के बीच अगर कोई फैसला उनके खिलाफ आ जाता है तो उनकी कुर्सी जाना तय है।