नई दिल्ली: मार्च 2017 के बाद से तीन बड़े नक्सली हमलों में अपने 46 जवानों की शहादत दे चुके केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने केंद्र सरकार से मांग की है कि उसे मोबाइल टैपिंग और तकनीकी निगरानी करने की इजाजत दी जाए ताकि नक्सलियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई में मदद मिल सके और जवानों को बचाया जा सके. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक सीआरपीएफ काफी समय से सरकार से इस तरह की मांग कर रही है ताकि दुश्मनों के खिलाफ ज्यादा मजबूती से और संगठित तरीके कार्रवाई की जा सके.

जम्मू कश्मीर, नक्सली प्रभावित 10 राज्यों और उत्तर पूर्व में विद्रोहियों से लड़ने वाली सीआरपीएफ इस समय नक्सलियों से, जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों से निपटने और उनके आगे के प्लान के बारे में खुफिया जानकारी के लिए पूरी तरह से इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और राज्यों की पुलिस पर आश्रित है इसलिए अब सीआरपीएफ ने सरकार से अपने स्तर पर निगरानी करने की इजाजत मांगी है.

राज्य पुलिस को भी है इजाजत

पैरामिलिट्री फोर्स सीआरपीएफ को अभी खुफिया जानकारी के लिए किसी का मोबाइल टैप, इंटरनेट पर निगरानी या सोशल मीडिया पर किसी पर निगरानी रखने की इजाजत नहीं है. वहीं दूसरी ओर नक्सल प्रभावित राज्य तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की पुलिस खुफिया जानकारी जुटाने के लिए तकनीकी तौर पर काफी मजबूत है और इसीलिए नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान इन राज्यों की पुलिस को ज्यादा नुकसान नहीं उठाना पड़ता.

इन राज्यों की पुलिस के अलावा केंद्रीय जांच एजेंसी जैसे इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), डीआरआई, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), नेशनल क्राइम ब्यूरो (एनसीबी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पास भी दुश्मनों से निपटने के लिए खुफिया जानकारी जुटाने के लिए मोबाइल टैप के साथ साथ तकनीकी तौर पर निगरानी करने की मंजूरी है. सूत्रों के मुताबिक सरकार सीआरपीएफ को तकनीकी निगरानी रखने के लिए फोन टैप करने जैसे अधिकार पर स्पष्ट नहीं है, पिछले काफी समय से उठाई जा रही इस मांग को पूरा करने में सरकार के सामने समस्या है कि कुछ आंतरिक रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि फोन टैपिंग जैसे अधिकार सीआरपीएफ को देने से बेवजह का विवाद जन्म ले सकता है.

क्या कहते हैं जानकार 

इस मामले पर पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जी के पिल्लई का कहना है कि, ”मुझे नहीं लगता कि कोई भी सरकार सीआरपीएफ या किसी अन्य पैरामिलिट्री फोर्स को फोन टैपिंग करने जैसे अधिकार देगी. सीआरपीएफ को नक्सलियों की हरकतों पर नजर रखने के लिए ड्रोन की सुविधा दी गई है. वैसे भी नक्सली फोन के इस्तेमाल को लेकर काफी सतर्क हो चुके हैं और अब वो अपनी जानकारी अपने किसी आदमी के सहारे जंगल में भेजते हैं”.

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए एक केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ”केंद्रीय पुलिस बल को फोन टैपिंग जैसे अधिकार देना संभव नहीं है, ऐसा करने से केंद्रीय जांच एजेंसियों के बीच आपसी सहयोग में कमी आ सकती है. वर्तमान में जानकारी जुटाने के लिए मल्टी एजेंसी सेंटर (एमएसी) एक अच्छा सिस्टम बना हुआ है”. 13 मार्च को एक आईईडी ब्लास्ट में सीआरपीएफ के 9 जवान शहीद हो गए थे. इससे पहले 2 अप्रैल 2017 को भी नक्सलियों ने सीआरपीएफ के 25 जवानों को मार दिया था. इस घटना से एक महीने पहले भी सुकमा में नक्सिलयों ने घात लगाकर सीआरपीएफ के 12 जवानों को मार दिया था. इसी बीच शनिवार को सीआरपीएफ की 79वीं सालगिरह के मौके पर बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है और इसीलिए नक्सली अब घात लगाकर जवानों के खिलाफ हमले कर रहे हैं क्योंकि वो आमने-सामने से लड़ने की ताकत खो चुके हैं