भारत के पास बचा है 25 दिन का कच्चा तेल, मिडिल ईस्ट में लंबी चली जंग तो कितना बढ़ जाएगा पेट्रोल-डीजल का दाम?

ईरान का होर्मुज स्ट्रेट रूट अरब मुल्कों के साथ भारत के तेल-गैस व्यापार का अहम गलियारा है. यहां से भारत का 50% कच्चा तेल आता है. ईरान ही नहीं, सऊदी अरब और UAE से लेकर कतर-कुवैत जैसे देशों से भारत को तेल-गैस की सप्लाई इसी रूट से होती है.

Published date india.com Updated: March 3, 2026 8:39 PM IST
भारत के पास बचा है 25 दिन का कच्चा तेल, मिडिल ईस्ट में लंबी चली जंग तो कितना बढ़ जाएगा पेट्रोल-डीजल का दाम?
भारत में रोजाना 26 लाख बैरल तेल होर्मुज रूट से आता है. (फोटो- AI जेनरेटेड)

इजरायल-अमेरिका के साथ ईरान की जंग का मंगलवार (3 मार्च) को चौथा दिन है. मिडिल ईस्ट में चल रही इस जंग का असर भारत के तेल, व्यापार, शेयर बाजार और सोना-चांदी की कीमतों पर दिख सकता है. असल में लगातार हमलों के बाद ईरान ने कच्चे तेल के व्यापार के अहम रूट होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का ऐलान किया है. भारत का 50% कच्चा तेल इसी रूट से आता है. अगर ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जंग आगे बढ़ती है, तो संभव है कि ईरान अपने होर्मुज स्ट्रेट रूट को लंबे वक्त तक बंद रखे. इससे भारत को हर महीने होने वाली तेल सप्लाई का आधा हिस्सा खतरे में पड़ जाएगा.

हालांकि, भारत सरकार का कहना है कि उसके पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है. इसलिए फिक्र की बात नहीं है. लेकिन, सरकार के सूत्रों का कहना है कि देश में अभी कच्चे तेल, गैस, LPG और LNG का 25 दिनों का ही स्टॉक है.

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अंडरग्राउंड स्टॉक में जमा है कच्चा तेल?
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में एक्सपर्ट के हवाले से बताया गया है कि भारत ने किसी भी जंग या ग्लोबल क्राइसिस से निपटने के लिए अंडरग्राउंड स्टॉक में कच्चा तेल जमा करके रखा है. ये अंडरग्राउंड स्टॉक विशाखापत्तनम, मैंगलोर और पादुर में हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें करीब 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) कच्चा तेल जमा करने की कैपासिटी है.

कितना महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ईरान इस रास्ते को ब्लॉक करता है, तो इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की सप्लाई घट जाएगी. ऐसे में कच्चे तेल की कीमतें 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. फिलहाल ब्रेंट क्रूड 70 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास ट्रेड कर रहा हैं. अगर कच्चे तेल की सप्लाई रुक जाती है, तो जाहिर तौर पर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे. रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में पेट्रोल 95 लीटर से बढ़कर 105 तक पहुंच सकता है. डीजल 88 से बढ़कर 96 रुपये तक जा सकता है.

भारत के लिए इतना अहम क्यों होर्मुज स्ट्रेट?
ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऑयल रूट है. भारत अपनी जरूरत का कच्चा तेल सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई जैसे देशों से मंगवाता है. इनमें से 50% हिस्सा इसी रूट से आता है.

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होर्मुज रूट से रोजाना आता है 26 लाख बैरल तेल
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में रोजाना 26 लाख बैरल तेल होर्मुज रूट से आता है. जनवरी-फरवरी में भारत के कुल मंथली ऑयल इंपोर्ट का करीब 50% हिस्सा होर्मुज के रास्ते ही आया. वहीं, नवंबर-दिसंबर 2025 में यह आंकड़ा 40% था. ट्रंप के टैरिफ लगाने के बाद भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना काफी कम कर दिया है. इसलिए होर्मुज रूट पर तेल खरीदने की मात्रा में जाहिर तौर पर इजाफा ही हुआ होगा.

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10% नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट पर भी संकट
भारत का व्यापार भी ईरान और इजरायल के युद्ध से संकट में है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के कुल नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का 10% से ज्यादा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते ही जाता है. इसमें बासमती चावल, चाय, मसाले, ताजे फल, सब्जियां और इंजीनियरिंग सामान भी शामिल हैं. ऐसे में अगर ईरान ने रूट बंद कर दिया तो माल की ढुलाई महंगी हो जाएगी. इससे एक्सपोर्टर्स की लागत बढ़ जाएगी. आखिर में ग्लोबल मार्केट में भारतीय सामान महंगा हो जाएगा.

तेल के लिए रूस का रूख कर सकता है भारत
मिडिल ईस्ट में मची उथल-पुथल के बीच भारत तेल की सप्लाई के लिए एक बार फिर से अपने पुराने सप्लायर रूस का रूख कर सकता है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने का प्लान बना रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत उन रूसी तेल कार्गो को खरीदने पर विचार कर रहा है, जो फिलहाल भारतीय समुद्र के करीब या एशियाई जल क्षेत्र में मौजूद हैं.

रिपोर्ट बताती है कि इस समय करीब 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल टैंकरों में भरकर एशियाई देशों के आसपास वेटिंग मोड में है. ऐसे में अगर भारत ने इस समय रूस से डील की, तो तेल जल्दी मिलेगा और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट भी कम होगा.

फरवरी में रूस से खरीदा गया कम तेल
बता दें कि अमेरिकी दबाव और प्रतिबंधों की सख्ती के कारण भारत ने पिछले कुछ महीनों में रूस से तेल की खरीद कम कर दी थी. फरवरी में भारत ने रूस से प्रतिदिन केवल 10 लाख बैरल तेल खरीदा, जो सितंबर 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है.

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