नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने बीजेपी से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में शुक्रवार को 10 साल की सजा सुनाई. जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने सेंगर और उसके भाई अतुल सेंगर को बलात्कार पीड़िता के परिवार को 10-10 लाख रुपए देने का आदेश भी दिया. Also Read - Coronavirus को लेकर राम गोपाल वर्मा ने किया भद्दा मज़ाक, यूजर्स बोले- थोड़ी तो शरम करो, पुलिस लेगी एक्शन

मामले में दोषी करार दिए गए दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. इसमें माखी थाने के तत्कालीन प्रभारी अशोक सिंह भदौरिया और तत्कालीन उपनिरीक्षक के. पी. सिंह शामिल हैं. Also Read - VIDEO: कोरोना संकट के बीच दिखा ये नजारा, विधायक ने खुलेआम एएसआई के छुए पैर

पीड़िता के पिता की 9 अप्रैल, 2018 को न्यायिक हिरासत में मौत हो गई थी. पीड़िता का 2017 में सेंगर ने कथित तौर पर अपहरण कर बलात्कार किया था. घटना के समय वह नाबालिग थी. बता दें कि 2017 में लड़की से बलात्कार के एक अन्य मामले में सेंगर को पिछले वर्ष 20 दिसंबर को स्वभाविक मौत होने तक जेल में रहने की सजा सुनाई गई थी. Also Read - कांग्रेस ने सामूहिक पलायन पर सरकार से पूछे सवाल, कहा- गरीबों की जिंदगी मायने रखती है या नहीं

अदालत ने गैर इरादतन हत्या के मामले में चार मार्च को सेंगर और सात अन्य को दोषी ठहराया था और कहा था कि उनका पीड़िता के पिता की हत्या करने का इरादा नहीं था.

अदालत ने सेंगर, भदौरिया और सिंह के साथ विनीत मिश्रा, बीरेन्द्र सिंह, शशि प्रताप सिंह, सुमन सिंह और अतुल (सेंगर के भाई) को भादंसं की धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी पाया था.

इसके अलावा उन्हें आईपीसी की धारा 341 (गलत तरीके से बंधक बनाना), 304 (गैर इरादतन हत्या) सहित कई अन्य धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था. बहरहाल अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए कांस्टेबल आमिर खान, शैलेन्द्र सिंह, रामशरण सिंह और शारदावीर सिंह को बरी कर दिया था.

सीबीआई ने मामले के पक्ष में 55 गवाहों को पेश किया था और बचाव पक्ष ने 9 गवाहों से जिरह की थी. अदालत ने पीड़िता के चाचा, मां, बहन और उसके पिता के एक सहकर्मी का बयान दर्ज किया था जिन्होंने घटना में प्रत्यक्षदर्शी होने का दावा किया था.

सीबीआई के मुताबिक तीन अप्रैल 2018 को बलात्कार पीड़िता के पिता और शशि प्रताप सिंह के बीच विवाद हुआ था. 13 जुलाई 2018 को दायर आरोपपत्र के मुताबिक पीड़िता के पिता और उनके सहकर्मी अपने गांव माखी लौट रहे थे जब उन्होंने शशि से लिफ्ट मांगी थी.

सीबीआई ने आरोप लगाए कि शशि ने उन्हें लिफ्ट देने से मना कर दिया जिसके बाद उनके बीच विवाद हो गया. इसने कहा कि इसके बाद शशि ने अपने सहयोगियों को बुलाया जिस पर कुलदीप का भाई अतुल सिंह सेंगर वहां अन्य के साथ पहुंचा और महिला के पिता और सहकर्मी की पिटाई कर दी. इसके बाद महिला के पिता को वे थाने ले गए जहां उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पिछले वर्ष एक अगस्त को उत्तरप्रदेश की निचली अदालत से मामले को दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया था.