नई दिल्ली. केन्द्रीय सतर्कता आयोग (CVC) द्वारा उसकी जांच रिपोर्ट में भ्रष्टाचार और कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही के आरोपों के कारण आलोक वर्मा को सीबीआई प्रमुख के पद से हटना पड़ा. जांच एजेंसी के 50 साल से अधिक के इतिहास में यह अपनी तरीके का पहला मामला है. सीवीसी की जांच रिपोर्ट में खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ (RAW) द्वारा की गई ‘टेलीफोन निगरानी’ का हवाला दिया गया. अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीत उच्चशक्ति प्राप्त समिति ने सीवीसी रिपोर्ट पर विचार किया. इस रिपोर्ट में 1979 बैच के आईपीएस अधिकारी वर्मा पर आठ आरोप लगाए गए. वर्मा को उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को बहाल किया था. अधिकारियों ने कहा कि वर्मा को हटाने का समिति का फैसला 2:1 के बहुमत से किया गया. कांग्रेसी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसका विरोध किया जबकि जस्टिस एके सीकरी सरकार के साथ खड़े हुए.

पीएम की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने CBI निदेशक आलोक वर्मा को हटाया, CVC की रिपोर्ट पर कार्रवाई

सीवीसी रिपोर्ट में विवादित मांस कारोबारी मोइन कुरैशी के मामले का जिक्र किया गया और दावा किया गया कि इस मामले पर गौर कर रही सीबीआई टीम हैदराबाद के कारोबारी सतीश बाबू सना को इस मामले में आरोपी बनाना चाहती थी, लेकिन वर्मा ने मंजूरी नहीं दी. इस मामले में जांच विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के नेतृत्व में की गई. अस्थाना और वर्मा को 23 अक्टूबर को छुट्टी पर भेजा गया था. अधिकारियों ने कहा कि सीवीसी रिपोर्ट में बाहरी खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ द्वारा फोन पर पकड़ी गई बातचीत का भी जिक्र है. खास बात यह है कि सना, अस्थाना के खिलाफ दर्ज मामले में शिकायतकर्ता है. उसने इस मामले में अपने बिचौलियों को दी गई रिश्वत के बारे में जानकारी दी थी.

उसने ‘रॉ’ के दूसरे शीर्ष अधिकारी सामंत गोयल के नाम पर भी जिक्र किया जो बिचौलिये मनोज प्रसाद को बचाने में कथित रूप से शामिल थे. एक अन्य मामला सीबीआई द्वारा गुड़गांव में भूमि अधिग्रहण के बारे में दर्ज शुरुआती जांच से संबंधित है. सीवीसी ने आरोप लगाया कि इस मामले में वर्मा का नाम सामने आया था. सीवीसी ने इस मामले में विस्तृत जांच की सिफारिश की थी. सीवीसी ने यह भी आरोप लगाया था कि वर्मा ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री लालू प्रसाद से जुड़े आईआरसीटीसी मामले के एक अधिकारी को बचाने का प्रयास भी किया था. आयोग ने यह भी आरोप लगाया कि वर्मा सीबीआई में दागी अधिकारियों को लाने की कोशिश कर रहे हैं.

बहरहाल, सरकार के अधिकारियों ने बताया कि आलोक वर्मा का दो वर्षों का निर्धारित कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त होने वाला है और वह उसी दिन सेवानिवृत्त होने वाले हैं. सीबीआई के 55 वर्षों के इतिहास में इस तरह की कार्रवाई का सामना करने वाले जांच एजेंसी के वह पहले प्रमुख हैं. गुरुवार शाम जारी एक सरकारी आदेश में बताया गया कि वर्मा को केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत दमकल सेवा, नागरिक रक्षा और होमगार्ड महानिदेशक के पद पर तैनात किया गया है. सीबीआई का प्रभार अतिरिक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को दिया गया है.