नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने मंगलवार को संसद में बताया कि 2015 में हर दिन 23 किसानों ने आत्महत्या की. जबकि 2014 में हर दिन आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या 15 थी. कृषि मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने 2015 के बाद किसानों की आत्महत्या से संबंधित डाटा कंपाइल करना बंद कर दिया. गृह मंत्रालय ने अपने प्रकाशन एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया (ADSI) में किसानों की आत्महत्याओं की सूचनाओं को कंपाइल किया है. राधा मोहन सिंह ने बताया कि आत्महत्या की ये रिपोर्ट 2015 तक उपलब्ध है. 2016 के बाद की रिपोर्ट अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है. रिपोर्ट के अनुसार, 2014 में कुल 5,650 किसानों ने आत्महत्या की थी जबकि 2015 में 8,007 किसानों ने आत्महत्या की.

कृषि मंत्री का कहना है कि 2015 की रिपोर्ट के अनुसार दिवालियापन या कर्ज और खेती से संबंधित मुद्दे किसानों के बीच आत्महत्या के प्रमुख कारण रहे. कृषि मंत्री ने बताया कि राज्य सरकारें आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों की सहायता करती हैं. मंत्री ने बताया कि कुछ राज्य आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को राहत देते हैं, जिनमें परिवार के सदस्यों के पुनर्वास की दिशा में कर्ज और देनदारियों को खत्म करना, मृतक किसानों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा और अन्य सुविधाएं शामिल हैं.

किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य
उन्होंने बताया कि सरकार ने 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है. किसानों की आय दोगुनी करने से संबंधित मुद्दों की जांच करने और 2022 तक वास्तविक रूप से किसानों की आय दोगुनी करने की रणनीति की सिफारिश करने के लिए सरकार ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राष्ट्रीय वर्षा क्षेत्र प्राधिकरण, कृषि विभाग, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग की अध्यक्षता में एक अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया है. पैनल ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. इसने फसल उत्पादकता में सुधार सहित आय वृद्धि के सात स्रोतों की पहचान की गई है.

किसानों को मिलेंगे 6000
बता दें कि सरकार ने छोटे एवं सीमान्त किसानों को राहत देने के लिए 6,000 सालाना की न्यूनतम वार्षिक आय देने की योजना पेश की है. वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को 2019-20 का बजट पेश करते हुए ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ (प्रधानमंत्री किसान योजना) की घोषणा की. इस योजना का लाभ दो हेक्टेयर से कम जोत वाले किसानों को मिलेगा. योजना से 12 करोड़ किसानों को लाभ मिलेगा. इसके तहत किसानों को हर साल 6,000 रुपये की सहायता प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिये उनके बैंक खाते में प्रदान की जाएगी. यह राशि उन्हें 2,000-2,000 रुपये की तीन किस्तों में दी जाएगी. पहली किस्त अगले महीने की 31 तारीख तक किसानों के खातों में डाल दी जाएगी.

कम ब्याज पर कर्ज की व्यवस्था
इसके अलावा कृषि क्षेत्र में संकट से निपटने के लिए वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के लिए दो प्रतिशत की ब्याज सहायता की घोषणा की, जबकि समय पर ऋण भुगतान के लिए उन्हें तीन प्रतिशत अधिक सहायता की पेशकश की गई है. उन्होंने पशुपालन और मत्स्य पालन में लगे किसानों के लिए भी दो प्रतिशत की ब्याज सहायता की घोषणा की. प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे किसानों को दो प्रतिशत ब्याज सहायता और समय पर कर्ज पुनर्भुगतान करने वाले किसानों को तीन प्रतिशत की अधिक सहायता मिलेगी.