नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा विधानसभा भंग किए जाने के बाद राजनीति गरमा गई है. राज्यपाल विपक्ष के निशाने पर हैं. वहीं बीजेपी नेता राम माधव ने बड़ा आरोप लगाया है. माधव ने कहा कि पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस को पाकिस्तान से निर्देश मिले थे. नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने भाजपा महासचिव राम माधव को चुनौती दी कि वह अपने आरोप को साबित करें कि पाकिस्तान के कहने पर पीडीपी-एनसी गठबंधन हुआ है. अगर ऐसा नहीं कर सकते तो माफी मांगें. Also Read - Zimbabwe vs Pakistan, 1st Test: पहले टेस्ट मैच में पाकिस्तान ने जिम्बाब्वे को पारी से हराया, तीन दिन के अंदर जीता मैच

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राम माधव ने कहा कि बीजेपी ने अपनी ओर से सरकार बनाने की कभी इच्छा जाहिर नहीं की. उन्होंने कहा कि हमने कब ऐसा दावा किया कि हम सरकार बनाने जा रहे हैं? हमने हमेशा कहा कि हमें आगे बढ़ने के लिए राज्यपाल शासन की आवश्यकता है. ये वही दल हैं जो राज्य में एक अनैतिक गठबंधन तैयार करना चाहते हैं. माधव ने कहा कि पीडीपी और एनसी वही दल हैं जिन्होंने पिछले महीने निकाय चुनावों का बहिष्कार किया था क्योंकि उन्हें सीमा पार से ऐसा करने के निर्देश मिले थे.

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राम माधव ने कहा कि हो सकता है कि उन्हें सीमा पार से ही साथ आकर सरकार बनाने के निर्देश मिले हों क्योंकि बीजेपी और अन्य दलों ने निकाय चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया है. उन्होंने कहा कि जो भी कारण हों, जो फैसला उनके द्वारा किया गया है, उसी के चलते राज्यपाल ने विधानसभा भंग किया.

नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला का कहना है कि जम्मू-कश्मीर को इस ‘मौजूदा हालात’ और अनिश्चितता से उबारने से लिए ही उनकी पार्टी ने प्रदेश में सरकार बनाने के लिए चिर प्रतिद्वंद्वी पीडीपी को समर्थन देने का फैसला लिया है. अब्दुल्ला ने प्रदेश में सरकार बनाने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त और धन के उपयोग संबंधी दावों की जांच कराने की मांग की. अब्दुल्ला ने कहा, ‘देश की सम्प्रभुता की रक्षा के लिए नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकर्ताओं के बलिदान को आप नहीं भुला सकते. उन्हें माफी मांगनी चाहिए.’

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वहीं कांग्रेस नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा कि राज्यपाल से हमें किसी तरह की शिकायत नहीं है, वह एक अच्छे आदमी हैं. हमें केंद्र सरकार से शिकायत है अगर उन्हें विधानसभा भंग ही करना था तो 4-5 महीना पहले करते जब उन्होंने पीडीपी से समर्थन वापस लिया और सरकार गिरा दी थी. इन चार-पांच महीनों में बीजेपी ने सरकार बनाने की भरपूर कोशिश की लेकिन उन्हें बहुमत नहीं मिला, इसके बाद उन्होंने दूसरी पार्टियों के विधायकों को तोड़ने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुआ. जब उन्होंने देखा कि दूसरे लोग सरकार सरकार बना रहे हैं तो उन्होंने विधानसभा भंग कर दी.

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दूसरी ओर राज्यपाल ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि उन्होंने राज्य के संविधान के अनुरूप और उसके हित में यह फैसला लिया. मलिक ने कहा विधायकों की खूब खरीद-फरोख्त हो रही थी. साथ ही कहा कि वह दल-बदल के जरिए सरकार बनाने की अनुमति नहीं दे सकते थे. उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि मैंने जम्मू-कश्मीर के संविधान के अनुरूप काम किया और राज्य के हित में विधानसभा भंग की. राज्यपाल ने कहा कि वह चाहते हैं कि राज्य में चुनाव हों और एक निर्वाचित सरकार कामकाज संभाले.

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राजभवन में फैक्स मशीन के काम नहीं करने को लेकर उन्होंने कहा कि बुधवार को ईद थी. सरकार बनाने का दावा पेश करने के पीडीपी के पत्र के साथ ही नेशनल कॉन्फ्रेंस का समर्थन पत्र राज्यपाल के कार्यालय को प्राप्त नहीं होने के पीछे फैक्स नहीं मिलना वजह बताई गई थी. उन्होंने कहा कि नेकां के उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती दोनों को यह पता होना चाहिए कि उस दिन कार्यालय बंद रहते हैं.