नई दिल्ली: मुस्लिम महिलाओं को डिजाइनर बुर्का पहनना, चुस्त बुर्का या कपड़े पहनना नाजायज है. यह फतवा उत्तर प्रदेश में सहारनपुर जिले के दारुल उलूम देवबंद ने जारी किया है. फतवे में कहा गया है कि डिजाइनर बुर्का या लिबास पहनकर महिलाओं का घर से बाहर निकलना जायज नहीं है. मुफ्तियों का कहना है कि पर्दे के नाम पर ऐसा बुर्का पहनकर घर से निकलना जायज नहीं है, जिसकी वजह से किसी अजनबी मर्द की निगाहें उनकी तरफ जाएं. Also Read - दारुल उलूम का एक और फतवा: दुल्हन की मुंह दिखाई, खीर चटाई, जूता चुराई भी हराम

Also Read - यूपी: PM मोदी बोले- 'कांग्रेस चाहती है कि मुस्लिम महिलाओं का तलाक होता रहे, उनका जीवन नरक बना रहे'

देवबंद के ही एक व्यक्ति ने दारुल उलूम के इफ्ता विभाग से लिखित सवाल पूछा था- मुस्लिम औरतों के लिए ऐसा बुर्का या लिबास पहनना कैसा है जिसमें औरतों की आजा (शरीर के अंग) जाहिर होते हों. ऐसा चमक-दमक का बुर्का पहन कर बाजार जाना कैसा है? जिसकी वजह से गैर मर्दों की निगाहें उसकी तरफ उठती हों. यह भी पढ़ें: बुर्का-हिजाब पहनकर क्रिकेट पिच पर उतरीं कश्मीर की महिला क्रिकेटर Also Read - Islam | Darul Uloom | Shaving | Permissible | Cleric | Fatwa | Deoband | शेविंग करना और दाढ़ी कटवाना नाजायज़', दारुल उलूम का फ़तवा

दारुल उलूम देवबंद के मुफ्तियों की खंडपीठ ने उक्त सवाल का लिखित जवाब देते हुए कहा है- मोहम्मद साहब ने इरशाद फरमाया है की औरत छुपाने की चीज है. क्योंकि जब कोई औरत बाहर निकलती है तो शैतान उसे घूरता है. इसलिए बिना जरूरत औरत को घर से नहीं निकलना चाहिए.

जब जरूरत पर घर से निकले तो अपने जिस्म को इस तरह छुपाए कि उसके आजा (शरीर के अंग) जाहिर न हों, यानी ढीला लिबास पहन कर निकले. तंग व चुस्त लिबास या बुर्का पहन कर निकलना और लोगों को अपनी ओर आकर्षित करना हरगिज जायज नहीं है और सख्त गुनाह है.