नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता आशुतोष के बाद अब आशीष खेतान ने भी खुद को सक्रिय राजनीति से अलग कर लिया है. दोनों ही नेताओं ने इसके लिए ‘निजी कारणों’ को जिम्मेदार ठहराया है. खेतान ने कहा कि वह वकालत के पेशे पर ध्यान केन्द्रित करना चाहते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वजह से उन्हें सक्रिय राजनीति से अलग रहना पड़ेगा. पिछले लोकसभा चुनाव में आशुतोष ने दिल्ली की चांदनी चौक और खेतान ने नR दिल्ली सीट से बतौर आप उम्मीदवार चुनाव लड़ा था.

देश के हर राज्य में अटल कलश यात्रा निकालेगी बीजेपी, मोदी-शाह ने सौंपा कलश

आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर पार्टी द्वारा पांच सीटों के लिये चयनित प्रभारियों में इन दोनों का नाम शामिल नहीं किए जाने को भी इनकी नाराजगी की वजह बताया जा रहा है. खेतान ने पार्टी से इस्तीफा देने संबंधी मीडिया में आई खबरों के बारे में स्पष्टीकरण देते हुये ट्वीट कर कहा, ‘‘मैंने वकालत शुरु करने के लिये ही गत अप्रैल में दिल्ली संवाद आयोग (डीडीसी) के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने सिर्फ इसी एक वजह को हकीकत बताते हुए कहा कि बाकी सब अफवाह है. इन अफवाहों में उनकी कोई रुचि नहीं है.

कांग्रेस नेता गुरुदास कामत का निधन, अस्पताल पहुंची सोनिया गांधी

इससे पहले 15 अगस्त को ही आशुतोष ने भी ‘नितांत निजी कारण’ बताते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया था. हालांकि उसी दिन आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आशुतोष के इस फैसले से असहमति जताते हुए कहा था कि उन्हें पार्टी से अलग नहीं होने के लिये मना लिया जायेगा. केजरीवाल की अध्यक्षता वाली पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) इन नेताओं के इस्तीफे पर अंतिम फैसला करेगी.

सर्वे: राहुल गांधी की लोकप्रियता बढ़ी, 46 प्रतिशत लोगों ने बताया पीएम मोदी का विकल्प

केजरीवाल के एक सहयोगी ने बताया कि हाल ही में हुई पीएसी की बैठक में इस बारे में कोई फैसला नहीं हुआ. हालांकि उन्होंने दोनों नेताओं की निजी कारणों की दलील से सहमति जताते हुए कहा कि संगठन के लिए सक्रिय तौर पर काम नहीं कर पाने की इनकी मजबूरी को समझते हुए पार्टी नेतृत्व दोनों नेताओं से आप से अलग होने के बजाय पार्टी से जुड़े रहने की अपील कर सकता है.