नई दिल्ली. आज महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि है. आज ही के दिन 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेजों से लड़ते हुए आजाद ने अपनी ही पिस्तौल से खुद को गोली मार ली थी, ताकि अंग्रेजों के हाथ पकड़े न जाएं. आजाद जीवनभर आजाद ही रहे और आजादी से जिए. 17 साल की उम्र में ‘हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’ में शामिल होकर उन्होंने अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे. उनका स्वभाव बहुत चंचल था, इसलिए रामप्रसाद बिस्मिल उन्हें ‘क्विक सिल्वर’ कहा करते थे. लखनऊ के पास काकोरी ट्रेन लुट कांड के बाद आजाद अपने साथियों के साथ बहुत दिनों तक गुपचुप तरीके से छुपकर रहे. इस दौरान उन्होंने झांसी में मोटर मैकेनिक तक का काम किया. झांसी में प्रवास के दौरान ही आजाद के जीवन का एक किस्सा बड़ा चर्चित रहा था जिसमें उन्होंने एक ड्राइवर को उसकी करनी की सीख दी थी. आइए पढ़ते हैं वह कहानी…

काकोरी कांड के कई क्रांतिकारियों को फांसी के दंड और कई को लंबी-लंबी कैद की सज़ाएं मिलीं. आजाद इस दौरान झाँसी में पनाह बनाए हुए थे. वहां उन्हें एक क्रांतिकारी साथी मास्टर रुद्रनारायण सिंह का अच्छा संरक्षण मिला. झांसी में ही सदाशिव राव मलकापुरकर, भगवानदास माहौर और विश्वनाथ वैशंपायन के रूप में उन्हें अच्छे साथी भी मिल गए थे. वहां उन्होंने अपना नाम भी बदल लिया था. वे हरिशंकर नाम से रह रहे थे. झांसी की ‘बुंदेलखण्ड मोटर कंपनी’ में कुछ दिन उन्होंने मैकेनिक के रूप में भी काम किया. मोटर चलाना सीखा और पुलिस अधीक्षक की कार चलाकर उनसे मोटर चलाने का लाइसेंस भी ले आए. मोटर कंपनी के एक ड्राइवर रामानंद ने आजाद को रहने के लिए अपने ही मोहल्ले में एक कोठरी किराए पर दिला दी थी. सब काम ठीक-ठीक चल रहा था; पर कभी-कभी कुछ घटनाएं मोहल्ले की शांति भंग कर देती थीं. आजाद की कोठरी के पास ही रामदयाल नाम का एक अन्य ड्राइवर सपरिवार रहता था. वैसे तो रामदयाल भला आदमी था, पर रात को जब वह शराब पीकर पहुंचता तो बहुत हंगामा करता और अपनी पत्नी को पीटता था. उस महिला का रोना मोहल्ले वालों को बहुत बुरा लगता था. पर लोग किसी के घरेलू मामले में दखल नहीं दे पाते थे.

 

चंद्रशेखर आजाद पर बनी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की डॉक्यूमेंट्री. (साभारः यूट्यूब)

आजाद से भिड़ना महंगा पड़ा ड्राइवर को
एक दिन सुबह-सुबह चंद्रशेखर आजाद कारखाना जाने के लिए अपनी कोठरी से बाहर निकले तो रामदयाल से उनकी भेंट हो गई. रामदयाल ने ही बात छेड़ी, ‘क्यों हरिशंकर जी ! आजकल आप बहुत रात जागकर कुछ ठोंका-पीटी किया करते हैं. आपकी ठुक-ठुक से हमारी नींद हराम हो जाती है. वैसे तो आजाद बात टाल देना चाहते थे, मगर रामदयाल ने जिस ढंग से बात कही थी, उन्होंने ईंट का जवाब पत्थर से देना उचित समझा. कहा, ‘रामदयाल भाई! मैं तो कल-पुर्जों की ही ठोंका-पीटी करता हूं, पर तुम तो शराब के नशे में अपनी गऊ जैसी पत्नी की ही ठोंका-पीटी करके मोहल्लेभर की नींद हराम करते रहते हो।’ आजाद का यह जवाब रामदयाल को बहुत अप्रिय लगा. उसे इस बात का बुरा लगा कि कोई उसके घरेलू मामले में क्यों दखलअंदाजी करे. वह गुस्से से भनभनाता हुआ उबल पड़ा, ‘क्यों बे! मेरी पत्नी का तू कौन होता है, जो तू उसका इस तरह से पक्ष ले रहा है? मैं उसे मारूंगा और खूब मारूंगा. देखता हूं, कौन साला उसे बचाता है.’ आजाद ने शान्त भाव से उसे उत्तर दिया- ‘जब तुमने मुझे साला कहा है, तो तुमने यह स्वीकार कर ही लिया है कि मैं तुम्हारी पत्नी का भाई हूं. अब एक भाई अपनी बहन को पिटते हुए नहीं देख सकता है. अब कभी शराब के नशे में रात को मारा तो ठीक नहीं होगा.’

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रामदयाल ने फिर कभी पत्नी पर हाथ नहीं उठाया
रामदयाल को चुनौती असह्य हो गई. वह आपा खोकर चिल्ला उठा- ‘ऐसी की तैसी रात की और नशे की. मैं बिना नशा किए ही उसे दिन के उजाले में सड़क पर लाकर मारता हूं. देखें, कौन साला आगे आता है उसे बचाने को.’ यह कहता हुआ रामदयाल गुस्से के साथ अपने घर में घुसा और पत्नी की चोटी पकड़कर घसीटता हुआ उसे बाहर ले आया और मारने के लिए हाथ उठाया. वह अपनी पत्नी पर वार कर भी नहीं पाया था कि आजाद ने उसका हाथ थाम लिया और झटका देकर उसे अपनी ओर खींचा. इस झटके से उसके हाथ से पत्नी के बाल छूट गए और वह मुक्त हो गई. अब आजाद ने एक भरपूर हाथ उसके गाल पर दे मारा. रामदयाल के गाल पर इतने जोर का तमाचा पड़ा कि उसकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया. वह अपने दोनों हाथों से अपना सिर थामकर बैठ गया. इस बीच आसपास के लोग दौड़े और कुछ लोग आजाद को समझाते हुए उसे कोठरी में ले गए. इस घटना के बाद कुछ दिन तक आजाद और रामदयाल की बोलचाल बंद हो गई. मगर कुछ ही दिनों के बाद आजाद ने खुद ही पहल करके उससे अपने संबंध मधुर बना लिए. अब वे उसे ‘जीजा जी’ कहकर पुकारने लगे. रामदयाल ने अपनी पत्नी को फिर कभी नहीं पीटा. इस घटना ने आजाद की धाक पूरे मोहल्ले में जमा दी.

(साभारः भारतडिस्कवरी.ओआरजी)